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Wednesday, 3 May 2017

शिक्षामित्रों की नौकरी पर संकटः सुप्रीम कोर्ट का यूपी के 1.75 लाख शिक्षामित्रों को हटाने का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यूपी में शिक्षण कार्य कर रहे पौने दो लाख शिक्षामित्रों को हटाकर उन्हें नए सिरे से भर्ती
करने का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि नई भर्ती होने तक मौजूदा शैक्षणिक सत्र तक शिक्षामित्रों को कार्य करने दिया जाएगा और जैसे ही नई भर्ती संपन्न होगी उन्हें उससे बदल दिया जाएगा।

जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने मंगलवार को ये टिप्पणियां तब की जब यूपी के एएजी अजय कुमार मिश्रा और नलिन कोहली ने कहा कि यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट के फैसले को कोर्ट सही मान रही है तो हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन हम 22 सालों से काम कर रहे पौने दो लाख लोगों का क्या करेंगे। कोर्ट ने कहा कि इसका समाधान हम बताएंगे।

पीठ ने कहा कि आप छह माह के अंदर नई भर्ती कीजिए। इस भर्ती को दिसंबर तक पूरा कीजिए। ऑनलाइन आवदेन सिस्टम से यह संभव है। इसके बाद अगले वर्ष मार्च तक नियुक्तियां कीजिए। तब तक शिक्षामित्रों को अध्यापन करने दीजिए। उन्हें इस भर्ती में बैठने का पूरा अधिकार होगा, उनके लिए उम्रसीमा का बंधन नहीं होगा, क्योंकि वह पहले से पढ़ा रहे हैं। जहां तक उन्हें दी जाने वाली वरिष्ठता का सवाल है तो यूपी सरकार नियम बनाकर उसे तय कर सकती है। इसमें कोई समस्या नहीं है।

नियुक्तियां असंवैधानिक
कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्तियां संवैधानिक के खिलाफ हैं क्योंकि आपने बाजार में मौजूद प्रतिभा को मौका नहीं दिया और उन्हें अनुबंध पर भर्ती करने के बाद उनसे कहा कि आप अनिवार्य शिक्षा हासिल कर लो। पीठ ने कहा कि यह बैकडोर एंट्री है जिसे उमादेवी केस (2006) में संविधान पीठ अवैध ठहरा चुकी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश को स्टे कर दिया था।

दूरदराज शिक्षा देने के लिए की थी भर्ती
यूपी सरकार ने कहा कि 1999 में शिक्षामित्रों की भर्ती प्रदेश के दूरदराज केक्षेत्रों में बालकों को बेसिक शिक्षा देने के लिए की गई थी। यह एक कल्याणकारी कदम था जिसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि 22 साल से चल रही यूपी सरकार की इस नीति को चुनौती नहीं दी है। जिन्होंने चुनौती दी है उनकी संख्या लगभग 200 है और उन्हें सरकार नौकरी में लेने को तैयार है।

अच्छी मंशा आंखों का धोखा है
कोर्ट ने कहा हम मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं हम यह पूछ रहे हैं कि आपने शिक्षामित्रों को योग्यता शिक्षा हासिल (बीएड,बीटीसी, दूरस्थ बीटीसी और टीईटी) करने के लिए किस नियम के तहत अनुमति दी। क्या आपने इसके लिए कोई विज्ञापन निकाला था क्या कोई चयन प्रक्रिया तय की थी। आपकी कल्याणकारी मंशा कुछ नहीं, आंखों का धोखा मात्र है, आपने नियमों के विरुद्ध भर्ती की है। जस्टिस ललित ने पूछा आप इस नतीजे पर किस आधार पर पहुंचे कि प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों की जरूरत है और आपने मार्केट में मौजूद प्रतिभा को महरूम कैसे किया। क्या इसे निष्पक्ष प्रतियोगिता कहा जा सकता है। आप कह रहे हैं इसे किसी ने चुनौती नहीं दी। जब तक ये अनुबंध था किसी को समस्या नहीं थी लेकिन जब आप नियमित करने लगे तक समस्या हुई। बिना विज्ञापन आप नियमित कैसे कर सकते हैं।

कोर्ट मामले को आज की समाप्त करना चाहता था लेकिन कुछ शिक्षामित्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने वह कुछ बहस करेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को बचकाना बताया और कहा कि उन्होंने यह नहीं देखा कि शिक्षामित्र रखने को उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा देना था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसला देते समय एक भी शिक्षामित्र को नोटिस नहीं दिया था। कोर्ट का समय पूरा होने के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी इसलिए कोर्ट ने मामला कल तक के लिए स्थगित कर दिया।

Tuesday, 2 May 2017

SHIKSHAMITRA: शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई रहेगी जारी। फ़र्ज़ी अफवाहों से बचे। कोई समायोजन रद्द नही किया गया है।

02 मई 2017: हियरिंग कल भी कंटिन्यू रहेगी , शिक्षामित्र से ही पुनः सुना जाएगा। शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई रहेगी जारी। फ़र्ज़ी अफवाहों से बचे. कोई समायोजन रद्द नही किया गया है।

जज साहब ने SM, B.ED & BTC सभी को खुली प्रतियोगिता के द्वारा मौका देने कि बात कही।

UPTET शिक्षामित्र, सुप्रीम कोर्ट केस Update


आज शिक्षामित्र का केस सुबह करीब 11:50 पर शुरू हुआ। बहस लगातार जारी। अब लंच के बाद यानी दोपहर 2 बजे से पुनः बहस जारी रहेगी।

मामला शिक्षामित्रों के विरुद्ध जाता हुआ दिख रहा है।

सभी लोगो से अपील है कि फैसला किसी के भी पक्ष में आये कृपया कोई भी किसी का उपहास न उड़ाए एवं कोई भी किसी भी तरह का गलत कदम न उठाएं, क्यों कि आप अपने परिवार एवं दोस्तों के लिए अमूल्य हैं।

टी ई टी वालो से विन्रम निवेदन है कि वो सोशल मीडिया या अन्य माध्यमो से किसी पर गलत टिपण्णी न करें। कृपया शब्दो पर संयम रखें।

UPTET: शिक्षामित्र मामले की सुनवाई हेतु आज शिक्षा मित्रो की तरफ से अधिवक्ताओं का पैनल

1-टॉप मोस्ट सीनियर अधिवक्ता राम जेठमलानी जी
2-टॉप मोस्ट सीनियर अधिवक्ता हरीश साल्वे जी (part heard mater)
3-सीनियर अधिवक्ता मोहन पारासरन जी
4-सीनियर अधिवक्ता सी० यू० सिंह जी
5-सीनियर अधिवक्ता जयंत भूषण जी
6-सीनियर अधिवक्ता महालक्ष्मी पवनी जी
7-सीनियर अधिवक्ता जगदीप  धनगढ़ जी

उ0प्र0प्राथमिक शिक्षामित्र संघ

UPPSMS के अनुभवी अधिवक्ताओं का पैनल.

1- सीनियर अधिवक्ता श्री शान्ति भूषण जी
2- सीनियर अधिवक्ता श्री पराग त्रिपाठी जी
3- सीनियर अधिवक्ता श्री नलिन कोहली जी
4- सीनियर अधिवक्ता श्री अमित सिब्बल जी
5- सीनियर अधिवक्ता श्री रुपेंदर सूरी जी
6- सीनियर अधिवक्ता श्री मनोज प्रसाद जी
7- सीनियर अधिवक्ता पी0चितम्बरम जी, सम्भावित

के0के0 वेणुगोपाल सरकार की तरफ से।

आर0वेंकट रमणी जी परिषद की तरफ से।

NCTE/MHRD के अधिवक्ताओं का आशीर्वाद रहेगा।

आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोशिएसन उ प्र की तरफ से।

श्री कपिल सिब्बल जी (वरि अधिवक्ता पूर्व एम एच आर डी मंत्री)
श्री सलमान खुर्शीद जी( सीनियर अधिवक्ता पूरव कानून मंत्री)
श्री पी एन मिश्रा जी( सीनियर अधिवक्ता सर्विस मैटर)
श्री अमन सिन्हा जी ( मोस्ट सीनियर अधिवक्ता सर्विस मैटर वरि नेता बी जे पी)
श्री सुधीश चन्द्र आग्रवाल जी ( वरि अधिवक्ता सर्विस मैटर)
श्री के एल जनजानी जी; सोभन मिश्र जी व अन्य जूनियर अधिवक्ता हमारे केस की पैरवी करेगे।

उ प्र सरकार की तरफ से
   1- मा श्री के के वेणुगोपाल जी
   2- मा श्री आर वेकट रमणी जी।

दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं का पैनल।

1- वरिष्ठअधिवक्ता सर्विस अजयेन्द्र सांगवान जी।
2- वरिष्ठ अधिवक्ता जे.के, मिश्रा।
3- वरिष्ठ अधिवक्ता गोल्ड मेडिलिस्ट राजीव कुमार।
4-वरिष्ठ अधिवक्ता रिशिना पराशर ।
5-अधिवक्ता सुनील पाण्डेय (जूनियर सुब्रमणियम स्वामी)
6-अधिवक्ता तरूणेश कुमार ।

इसके अतिरिक्त मिशन सुप्रीम कोर्ट की ओर से सीनियर अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस भी रहेंगे।

यूपी टीईटी साल में दो बार होने के आसार, एनसीटीई पहले ही दे चुकी है निर्देश

02 मई 2017: उत्तर प्रदेश में भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) वर्ष में दो बार कराने के आसार बढ़ गए हैं। इस संबंध में एनसीटीई यानी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद पहले ही निर्देश दे चुका है लेकिन प्रदेश में वर्षो से उसका अनुपालन नहीं हो रहा है। इधर लगातार गिर रहे परीक्षा परिणाम से अभ्यर्थी भी बार-बार परीक्षा का आयोजन चाहते हैं, ताकि वह शिक्षक बनने की अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करके दावेदारी कर सकें। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) भी दो बार परीक्षा कराने के सुझाव पर सहमति जता चुका है। इसके बाद भी दो बार परीक्षा का मुहूर्त तय नहीं हो पाया है।

उप्र का शिक्षा महकमा निर्देशों के बाद भी टीईटी का आयोजन वर्ष में दो बार नहीं कर पा रहा है। हालांकि एनसीटीई की गाइड लाइन में यह परीक्षा साल में दो बार कराने के स्पष्ट निर्देश हैं। उसमें यह भी कहा गया है कि वर्ष में कम से कम एक बार यह परीक्षा जरूर कराई जाए। कुछ माह पहले एनसीटीई ने देश के सभी राज्यों से टीईटी परीक्षा के साथ ही अन्य शैक्षिक सुधार के संबंध में तमाम सुझाव मांगे थे। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद एससीईआरटी में बैठक हुई। इसमें यूपी ने वर्ष में दो बार टीईटी परीक्षा कराने पर सहमति जताई गई है। अफसरों का कहना है कि अभी प्रदेश में दो बार परीक्षा कराने का खाका नहीं खींचा जा सका है। उधर, अधिकांश युवा भी वर्ष में दो बार टीईटी का आयोजन चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि पिछले वर्षो में यूपी टीईटी का परिणाम लगातार गिरता जा रहा है, बड़ी संख्या में युवा उसे उत्तीर्ण नहीं कर पाये हैं। उनका कहना है कि दो बार परीक्षा होने पर नियमित से उसे उत्तीर्ण करना आसान होगा।

UPTET: एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों के भाग्य का फैसला आज सुप्रीमकोर्ट में, हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 में किया था समायोजन रद्द

02 मई 2017: एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों के भाग्य का फैसला आज सुप्रीमकोर्ट में, हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 में किया था समायोजन रद्द। आज सुनवाई सुबह 10 बजे से शुरू होने के आसार।

Monday, 1 May 2017

कार्यवाहक के भरोसे बेसिक शिक्षा महकमा, अफसर ही नहीं चाहते कि उनकी बादशाहत में कमी आए

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा में पठन-पाठन पर विशेष जोर है। सत्र शुरू होने के बाद शैक्षिक कैलेंडर और फिर समय सारिणी जारी हो चुकी है। विद्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन इन कार्यो की मॉनीटरिंग करने वाले अफसर की कुर्सी खाली चल रही है। इधर दो माह से बेसिक शिक्षा महकमा कार्यवाहक 
के भरोसे है। शिक्षा निदेशक ही नहीं अपर शिक्षा निदेशकों के कई पद भी खाली हैं। निदेशालय से सारी सूचनाएं मंगाई जा चुकी हैं, पदोन्नति की तैयारियां ही पूरी हैं, लेकिन उसका मुहूर्त नहीं तय हो पा रहा है। कुछ अफसर ही नहीं चाहते कि उनकी बादशाहत में कमी आए।

पिछले साल शिक्षा विभाग में फेरबदल चरम पर हुआ है। बेसिक शिक्षा अधिकारी से लेकर शिक्षक तक के अंतर जिला, जिले क अंदर खूब तबादले हुए। यह सिलसिला चुनाव की अधिसूचना तक चलता रहा। इधर सरकार गठन के बाद शिक्षा महकमे में बड़े बदलाव छोड़िए जो नियुक्तियां हो रही थी। वह भी रुक गई हैं। विभागीय मंत्री जरूरी पदों पर अफसरों की तैनाती नहीं कर रहे हैं और न ही ‘दागी’ चेहरों से महकमे को मुक्त कराने की दिशा में बढ़ रहे हैं। संयुक्त सचिव अनिल कुमार बाजपेई ने बीते दिसंबर में ही नए शिक्षा निदेशक के चयन की प्रक्रिया शुरू की थी। इस पद पर उप्र शैक्षिक सामान्य शिक्षा संवर्ग सेवा समूह ‘क’ के अधिकारियों की पदोन्नति होनी है। शासन ने अपर शिक्षा निदेशक स्तर के आठ अफसरों संजय सिन्हा, विनय कुमार पांडेय, साहब सिंह निरंजन, रमेश, उत्तम गुलाटी, शैल कुमारी यादव, ममता रानी एवं नीना श्रीवास्तव के संबंध में गोपनीय रिपोर्ट व अन्य सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

वरिष्ठता में परिषद सचिव सिन्हा सबसे ऊपर है। यही नहीं जारी सूची में उत्तम गुलाटी 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो चुकी हैं और सूची के दो अन्य अफसर रमेश व शैल कुमारी यादव 2017 में ही सेवानिवृत्त होंगे। शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा बीते 28 फरवरी को सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उस समय आदर्श आचार संहिता के कारण पदोन्नति नहीं हो सकी। इसलिए बेसिक शिक्षा सचिव अजय कुमार सिंह ने ही यह अतिरिक्त प्रभार ले रखा है, जबकि नियमानुसार वरिष्ठ अपर शिक्षा निदेशक को यह कार्यभार ग्रहण करना चाहिए था। इसी तरह अपर शिक्षा निदेशक के तीन पद खाली चल रहे हैं। इसे भरने के लिए शासन ने शिक्षा निदेशालय से रिपोर्ट मांगी है। इस पद के लिए सरिता तिवारी, सुत्ता सिंह, अंजना गोयल, मंजू शर्मा, ललिता प्रदीप, शुभ्रा सिंह, अनारपति वर्मा, माया निरंजन, प्रभावती वर्मा, शील वर्मा, कमलेश प्रियदर्शी व गायत्री के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। इसके लिए प्रोफार्मा भी भेजा गया है।

शीर्ष कोर्ट से शिक्षामित्रों में बंधी नियुक्ति की उम्मीद, 32 हजार शिक्षामित्रों के समायोजन को लेकर असमंजस, सुनवाई 2 मई को

01 मई 2017: इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षामित्रों से लेकर शिक्षक भर्ती के तमाम प्रकरणों की सुप्रीम कोर्ट में सिलसिलेवार सुनवाई होने जा रही है। एक-एक करके सभी मामलों का कुछ ही माह में निस्तारण होने की चर्चा है। शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को 72825 शिक्षक भर्ती में जिस तरह के संकेत दिये हैं, उससे शिक्षामित्र गदगद हैं। साथ ही 32 हजार के समायोजन को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।

पिछले करीब एक वर्ष से बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों की सुनवाई शीर्ष कोर्ट में लगातार टल रही थी। इससे दो लाख 75 हजार शिक्षकों को लेकर उहापोह बना था। परिषदीय स्कूलों में 72825 शिक्षकों की भर्ती में 66 हजार अभ्यर्थियों की नियुक्ति टीईटी मेरिट व बीटीसी अभ्यर्थियों की भर्ती एकेडमिक मेरिट पर हुई है। इस पर शीर्ष कोर्ट ने नियुक्त अभ्यर्थियों को राहत देने का संकेत दिया है साथ ही अगली भर्तियों के लिए जल्द आदेश जारी होगा। इसके अलावा 12091 की नियुक्ति, 1100 याची प्रकरण की तस्वीर साफ नहीं है। वहीं, 9770, 10800, 29334, 4280, 10 हजार, 15 हजार, 16448 व 3500 उर्दू भर्ती भी न्यायालय के आदेश पर निर्भर हैं। 1बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एक लाख 37 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया जा चुका है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 सितंबर 2015 को समायोजन रद कर दिया था। इस आदेश के बाद करीब 32 हजार शिक्षामित्रों का समायोजन भी रोक दिया गया।

परिषदीय स्कूलों में चस्पा करें शिक्षकों की फोटो: सीएम योगी ने कहा शिक्षक बेवजह BSA, DIOS दफ्तर में दिखे तो कार्रवाई


घूस मांगने वालों की सीबीआइ में करें अब शिकायत, भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआइ की मुहिम, इन नम्बरों पर करें फोन और एसएमएस

लखनऊ : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में हथियार बनेगी। यदि केंद्र सरकार के किसी विभाग, कंपनी या सरकारी बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी कोई काम करने की बजाय घूस (रिश्वत) मांगें तो सीबीआइ को शिकायत कर कार्रवाई कराई जा सकती है। सीबीआइ ने खुद इसकी पहल करते हुए लैंड लाइन और मोबाइल फोन के नंबर जारी किए हैं।

सरकार यह संदेश देने में जुटी है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है। ऐसे में केंद्र सरकार के उपक्रमों में भी आमजन के साथ रिश्वतखोरी बंद करने पर जोर दिया गया है। सीबीआइ इस दिशा में आगे आई है। सीबीआइ के पुलिस अधीक्षक प्रणव कुमार ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार के किसी विभाग, कंपनी, सरकारी बैंक का कोई कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत मांगे तो सीबीआइ लखनऊ को फोन नंबर 0522-2234926 तथा 9415012635 पर शिकायत दर्ज कराएं या एसएमएस करें। यह नंबर जारी होने से आमजन को सीबीआइ से सीधे जुड़ने का रास्ता खुल गया है। इसमें न तो कहीं किसी के पास जाने की झंझट है और न ही किसी सोर्स-सिफारिश की जरूरत है। ऐसा भी नहीं कि सीबीआइ ने यह व्यवस्था पहली बार की है।

पहले भी समय-समय पर लोगों को जागरूक करते हुए सीबीआइ ने अभियान चलाया और उसका असर देखने को मिला है। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का एलान किया था। संकल्प पत्र में भी यह साफ कहा गया कि सरकार बनने पर भाजपा भ्रष्टाचार के कलंक को उखाड़ फेंकेगी। भाजपा सरकार बनने के बाद पिछले 15 वर्षो में हुए घोटालों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। बसपा शासन में बेची गई चीनी मिलों से लेकर सपा शासन में समाजवादी पेंशन, आगरा एक्सप्रेस वे और गोमती रिवर फ्रंट निर्माण में घोटालों और अनियमितता की जांच शुरू हो गई है। इस बीच और भी कई मामलों की फाइलें खंगाली जा रही हैं। सीबीआइ यादव सिंह समेत भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच में जुटी है।