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Friday, 19 May 2017

UPTET उ.प्र. शिक्षक भर्तीः शिक्षामित्र, एकेडमिक और टेट मेरिट पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला किया रिजर्व

19 मई 2017: सुप्रीम कोर्ट में सहायक अध्यापक पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने 12वें, 15वें, 16वें संशोधन, अकैडमिक, मेरिट एवं 9B टेट वेटेज पर सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रख लिया है। आज इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट बाद में इस पर फैसला सुनाएगी। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा कि हम कोर्ट द्वारा नियुक्त शिक्षक भर्ती को नहीं छेड़ेंगे। इसका मतलब है कि 72826 शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए टीचरों को कोई परेशानी नहीं होगी। 

NCTE की तरफ से कोर्ट में कहा गया है कि वेटेज देना राज्य सरकार का अधिकार है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा देने को कहा है। NCTE ने अपने पक्ष में कहा कि उसे सिर्फ न्यूनतम योग्यताओं से मतलब है। 
इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में इस पर फैसला सुरक्षित रख दिया गया था। शिक्षामित्रों के साथ-साथ यूपी सरकार भी इस फैसले के इंतजार में है। टैट पास शिक्षामित्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि यूपीटेट पास शिक्षामित्रों को छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि ये लोग पूरी तरह से योग्य हैं और इन्होंने टेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। 72826 भर्ती में भी इनका सिलेक्शन हो गया था लेकिन सरकार ने पहले से ही इनका समायोजन कर लिया था इसलिए इनको सहायक अध्यापक के पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस पर जज साहब ने कहा कि आप टैट है। हम इसको नोट कर लेते हैं।  इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश पर स्टे लगा दिया था।

क्या है मामला:

ये मामला पौने दो लाख शिक्षा मित्रों की सहायक शिक्षक बनाने का है। दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इनकी नियुक्ति को असंवैधानिक करार देकर इसे निरस्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ ही शिक्षा मित्र और यूपी सरकार एससी पहुंचे। 

UPTET फैसला सुरक्षित : तीन लाख से अधिक अध्यापको के भविष्य का मामला सर्वोच्च न्यायालय में हुआ कैद, जुलाई में कोर्ट खुलने पर आएगा फैसला, देखें आज की बहस का क्रम

सुनवाई समाप्त। फैसला रिजर्व हुआ।  जुलाई में कोर्ट खुलने पर आएगा फैसला। खाली पदों के लिए न्यायपीठ से टेटपास समायोजन की मांग हुई। याची लाभ पर भी चर्चा आरंभ। NCTE ने रखा पक्ष, NCTE ने कहा  केवल न्यूनतम योग्यताओं से मतलब। NCTE की तरफ से कहा गया कि वेटेज देना राज्य सरकार का अधिकार है, कोर्ट ने हलफनामा देने को कहा। न्यायपीठ का बड़ा बयान : 'हम सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त शिक्षकों को नही छेड़ेंगे'।केस और बहस आरंभ।  टेट वेटेज पर बहस केंद्रित। 16 वें संशोधन पर भी शुरू हुई बहस। न्यायपीठ ने पूछे कई सवाल।

Thursday, 18 May 2017

1.72 लाख शिक्षा मित्रों के भविष्य के लिए सुप्रीम कोर्ट ने परंपरा को तोडा

नई दिल्ली : यह कोई सुप्रीम कोर्ट की समरकालीन पीठ नहीं थी, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के 1.72 लाख शिक्षकों के भविष्य को देखते हुए अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया अदालती समय सीमा लीक से हटकर शाम 4.10 बजे के बाद इस मामले की सुनवाई शुरू की जो 6 बजे तक चली. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

उल्लेखनीय है कि शिक्षामित्रों की ओर से पेश सलमान खुर्शीद, अमित सिब्बल, नितेश गुप्ता, सहित अन्य वकीलों का कहना था कि शिक्षामित्र वर्षों से काम कर रहे हैं. वे अधर में हैं. इसलिए मानवीय आधार पर सहायक शिक्षक के तौर पर शिक्षामित्रों के समायोजन को जारी रखा जाए. इसीके साथ संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करने की मांग की गई।

बता दें कि जस्टिस आदर्श कुमार गोयल जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने बुधवार को सुनवाई की.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो भी पक्षकार लिखित रूप से अपना पक्ष रखना चाहता है वह एक हफ्ते के भीतर रख सकते हैं.सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया.बता दें कि 12 सिंतबर 2015 को हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के करीब 1.70 लाख शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन को निरस्त कर दिया था. इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

Wednesday, 17 May 2017

UPTET SHIKSHAMITRA: शिक्षामित्र केस में आज की सुनवाई का विवरण बिन्दुवार

  • शिक्षा मित्र मैटर पर आर्गुमेंट कंप्लीट। शिक्षा मित्र केस में WS दाखिल किया जा सकता है। अकेडमिक मैटर पर अगली सुनवाई 19 मई को 2 बजे से।

  • शिक्षा मित्र मामले पर आदेश रिजर्व। 7 दिन बाद जजमेंट रिलीज होगा। परसो 19 मई को बाकी मामले की सुनवाई होगी।
  • अगली तारीख शुक्रवार , सुनवाई दोपहर दो बजे से | एसएम केस लगभग समाप्त।
  • जूनियर और 16th अमेंडमेंट मामला 19 मई को

UPTET SHIKSHAMITRA: यूपी शिक्षामित्र मामलाः टेट पास शिक्षामित्रों ने जोरदार तरीके से रखा पक्ष, अगली डेट 19 मई


17 मई 2017: उत्तर प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को हुई। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस यूयू ललित की पीठ में सुनवाई पूरे दो घंटे चली। सुनवाई करीब 4.15 पर शुरू हुई और करीब 6.15 पर खत्म हुई। कोर्ट ने कहा कि अभी इस मामले पर और पक्षों को भी सुना जाना बाकी है। अतः सुनवाई 19 मई को दोपहर दो बजे से होगी। 


टैट पास शिक्षामित्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि यूपीटेट पास शिक्षामित्रों को छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि ये लोग पूरी तरह लयोग्य हैं और इन्होंने टेट परीक्षा

UPTET SHIKSHAMITRA: शिक्षामित्रों के केस में आज की सुप्रीमकोर्ट की सुनवाई का सार


17 मई 2017: आज कोर्ट न0 5 में शिक्षामित्र मामले को विस्तार से सुना गया। न्यायमूर्ति महोदय ने सभी शेष पक्षकारों के बिन्दुओ को गौर से सुना। आज मा0 सुप्रीम कोर्ट शिक्षामित्र समायोजन केस पर कोई भी निर्णय नही दे सके। निर्णय को सुरक्षित करते हुए अगले 7 दिनों में शेष पक्षकारों के लिखित दस्तावेज जमा करने का आदेश किया। सुनवाई के 2 चरण पूर्ण हुए। अंतिम और तीसरा चरण अकादमिक भर्ती केस शुक्रवार 19 मई को 2 बजे से सुना जाएगा।

Tuesday, 9 May 2017

UPTET SHIKSHAMITRA अगली तारीख 17 मई , समय बहुत दिलचस्प रखा है शाम को 4:10 पर | शिक्षामित्रों से पुनः शुरू होगी सुनवाई

09 मई 2017: अगली तारीख 17 मई , समय बहुत दिलचस्प रखा है शाम को 4:10 पर | शिक्षामित्रों से पुनः शुरू होगी सुनवाई | टोटल मर्सी मांग रहे हैं अब लेकिन आज अधिवक्ता आनंद नंदन जी बीएड का लोकस समझाने में कामयाब।

UPTET SHIKSHAMITRA शिक्षामित्र मामले सिविल अपील के सभी मामले निर्णीत होने के दो कदम की दूरी पर: अभी न तो कोई जीता

आज सुप्रीम कोर्ट में शिक्षामित्र पक्ष एवम उनके विरोधी पक्ष की सुनवाई हुई। जिसमें शिक्षामित्रों की तरफ से आर0 वेंकट रमणी,कपिल सिब्बल,मीनाक्षी लेखी,कोलिन गोंसाल्वेस प्रभावी बहस की। विरोधी पक्ष से अजीत सिंह,विभा मखीजा,आनंद नंदन,अमित पवन ने अभी समायोजन के विरुध्द दलील देकर याचियों को नियुक्त करने की अर्जी की। इसी बीच NCTE से सुप्रीम कोर्ट ने RTE एक्ट,NCTE एक्ट की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की।
*चूंकि शिक्षामित्र केस के लगभग सभी पक्षकारों,विपक्षकारो ने अपना लिखित सबमिशन जमा कर दिया है, आज बहस इन्ही लिखित सबमिशन पर केंद्रित रही।*
सुप्रीम कोर्ट के पूंछे जाने पर राज्य सरकार ने SSA की पैब रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश में वास्तविक खाली पदों (लगभग डेढ़ लाख) का भी लिखित दस्तावेज प्रस्तुत किया।
इन्ही संख्या के आधार पर याची लाभ की जुगत लगाए बैठे साथियो के मन मे एक आशा की किरण जाग गयी। जो कि बिल्कुल निराधार है,क्योंकि राज्य सरकार अब 72825 से एक भी ज्यादा पद न भरने का हलफनामा दाखिल कर चुकी है।

शिक्षामित्र मामलों में दायर अभी कुछ SLP अवशेष होने, वरिष्ठ अधिवक्ताओ के सुने जाने के  निवेदन पर सुप्रीम कोर्ट ने शेष बची याचिकाओ को 17 मई/18 मई में विशेष बेंच में सायं 4 बजे से सुने जाने की तिथि व समय मुकर्रर किया।

शिक्षामित्र केस में अभी कोई भी संभावना व्यक्त नही की जा सकती,लेकिन सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति महोदय ने कुछ सकारात्मक टिप्पणी जरूर की थी। लेकिन जब बात तथ्यों और कानूनों पर अवतरित हो तो कोई भी भविष्यवाणी नही की जा सकती।

शिक्षामित्र समायोजन मामला निर्णीत होने पर करीब 99 हजार अकादमिक भर्ती केस सुना जाएगा,जिसे आज न्यायमूर्ति महोदय ने स्वयं कहा।

अभी न तो कोई जीता, और न ही कोई हारा,लेकिन सिविल अपील अपने अंतिम चरण में जरूर है........

शिक्षामित्रों को अनुभव का वेटेज मिले- सुप्रीम कोर्ट

09 मई 2017: नई दिल्ली विशेष संवाददातायूपी में शिक्षामित्रों को नियमित करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि 1.75 लाख शिक्षामित्र 17 वर्षो से पढ़ा रहे हैं, उन्हें उसका कुछ वेटेज मिले। जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा कि उम्र सीमा में छूट के अलावा उन्हें शिक्षण अनुभव का वेटेज शिक्षक भर्ती आवेदन में मिलना चाहिए।

कोर्ट ने यह सकारात्मक टिप्पणी तब की जब बीएड और टीईटी पास अभ्यर्थी के वकीलों ने कहा कि शिक्षामित्र यूपी बेसिक के शिक्षा कानून के तहत शिक्षक नहीं हैं। उन्हें सरकार ने पीछे के रास्ते से प्रवेश दिया है। उन्हें उम्रसीमा में ही छूट दी जा सकती है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि यदि वे शिक्षक नहीं तो क्या हैं आप उनका वर्क प्रोफाइल बताएं। उनका वर्क प्रोफाइल यही है कि वे पढ़ा रहे हैं। उनका यह अनुभव टीईटी और बीएड से कहीं ज्यादा है, जो सिर्फ दो वर्ष के कोर्स हैं।

दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के वकील ने कहा कि 50 हजार से ज्यादा शिक्षामित्र पूरी योग्यता रखते हैं और वे टीईटी भी पास हैं। बीएड उम्मीदवारों के वकीलों ने दलील दी कि शिक्षक बनने के योग्य दो लाख से ज्यादा अभ्यर्थी हैं। उन्होंने कहा, शिक्षा के अधिकार कानून, 2010 लागू होने के बाद सरकार ने अब तक कोई ऐसा शपथपत्र पेश नहीं किया है, जिसमें यह आंकड़ा हो कि योग्य उम्मीदवार न होने से शिक्षामित्रों को रखना पड़ा था। कोर्ट ने पहले क्या कहा था पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी शिक्षामित्रों की नियुक्ति संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नहीं है। उमादेवी फैसले (2006) के तहत ये नियुक्तियां अवैध हैं। कोर्ट ने कहा था कि उन्हें भर्ती में बैठने के लिए उम्रसीमा में छूट दी जा सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट दो वर्ष पूर्व इन नियुक्तियों को अवैध ठहरा चुका है। मामले की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।


Monday, 8 May 2017

UPTET SHIKSHAMITRA: आज की सुप्रीमकोर्ट की सुनवाई का बिंदुवार सारांश

⚫ आज की बहस पूरी, कल भी रहेगी जारी,  दोनों पक्षों को मिलेगा एक एक घंटे का मौका। 
⚫ समायोजन के विरोधी पक्ष को अब मिला मौका अपना पक्ष रखने का,  शिक्षामित्रों के समायोजन को बताया अवैध। 
⚫ शिक्षामित्रों के दूरस्थ बीटीसी ट्रेनिंग पर NCTE का सकारात्मक जवाब।  NCTE के वकीलों का पक्ष पूरा।
⚫ प्राथमिक शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता पर न्यायपीठ ने पूछे सवाल। गाइडलाइन को विस्तार से बता रहे NCTE के वकील। 
⚫ शिक्षामित्रों को दिए गए प्रशिक्षण  को लेकर NCTE ने अपना पक्ष रखा। 
⚫ NCTE के वकील ने अपना पक्ष रखना किया प्रारंभ। 

आज सुनवाई लिस्ट हो चुकी है:

UPTET SHIKSHAMITRA CASE HEARING DETAILS

 DATE
 08-05-2017
 TIME
 02:00 
 COURT NO.
 13
ITEM NO.
 33
 JUSTICE
 HON'BLE MR. JUSTICE ADARSH KUMAR GOEL
HON'BLE MR. JUSTICE UDAY UMESH LALIT

Saturday, 6 May 2017

शिक्षामित्रों के पक्ष रखने के बाद अब प्रतिवादी क्या किस तैयारी से जाएं

शिक्षामित्र पक्ष की तीन दिन की बहस के बाद, रामजेठमलानी और शांतिभूषण जैसे दिग्गजों की जिरह के बाद, शिक्षामित्र पक्ष की ओर से तीन बिंदु तैयार हुए...

1 . हाईकोर्ट से शिक्षामित्रों को हटाने के पूर्व किसी शिक्षामित्र को नोटिस नहीं भेजा जिससे हाईकोर्ट का समायोजन निरस्त करने का फैसला गलत हो।

2. RTE Act section 23(2)  के तहत शिक्षामित्रों को छूट प्राप्त थी, अत: उनका समायोजन वैध है।

3. बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 के क्लाज़ 8 में शिक्षक बनने की योग्यता लिखी गई है जिसमें राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों को भी स्थान दिया है, अत: शिक्षक पद पर इनका समायोजन वैध है।
                    
 **और**
     प्रतिवादियों को निम्नलिखित जवाब देंने होंगे जिससे शिक्षामित्रों के दावों को खारिज किया जा सकता है

1. शिक्षामित्रों के समायोजन का शासनादेश जारी होने के बाद उसके विरुद्ध दाखिल मुकदमें में शिक्षामित्र समुदाय ने स्वयं को पक्षकार बनाया। न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार सिंह बघेल ने अंतरिम आदेश दिया कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी और सभी शिक्षामित्रों के नियुक्ति पत्र पर यह बात अंकित की जाय। अत: शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त करना विधिसम्मत है। अत: किसी भी नोटिस की जरूरत नहीं थी।

2. RTE Act section 23(1) द्वारा निर्धारित योग्यता के शिक्षक न मिलने पर Section 23(2) के तहत B. Ed.  के लिए छूट मांगी गई थी, और इस छूट से शिक्षामित्रों का कोई संबंध नहीं है। भारत सरकार के राजपत्र 23.08.2010 के पैरा(3)  में B.Ed के लिए छूट का स्पष्ट जिक्र है।


3. Rule-8 में वह योग्यताएं वर्णित हैं जिन्हें Rule-14 के तहत सहायक अध्यापक बनाया जाता है, उदाहरण--जैसे B.T.C  आदि। शिक्षामित्रों को RTE Act के पूर्व का शिक्षक बताकर प्रशिक्षण हेतु NCTE से प्रशिक्षण की इजाजत ली गई थी । अत: Rue-8 से इनका कोई संबंध नहीं है क्योंकि ये महज एक संविदाकर्मी हैं। नियमावली के संशोधन -19 के तहत सेवा नियमावली में इनके हेतु जो भी प्रावधान हुआ था, उसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षामित्र पद पर सर्विस रूल पर चयन न होने के कारण नियमावली के संशोधन-19 को ही रद्द कर दिया है। अत: शिक्षामित्रों के समायोजन के बचने का कोई भी विधिक आधार मौजूद नहीं है।

Friday, 5 May 2017

Shiksha Mitra News नियुक्ति आर्डर /प्रक्रिया के कागजात देखने के बाद: कोर्ट ने पूछे ये सवाल

जज साहब ने पूछा: ठीक है आपने शिक्षामित्रो को अप्पोइन्ट किया 2010 के पहले, लेकिन अध्यापक तो आपने इन्हें 2010 के बाद में बनाया। तो क्यों न लागू हो RTE एक्ट. इनपे?

आप कैसे कह सकते है कि ये para टीचर है। शिक्षामित्र नियुक्ति के समय क्या किसी ऐसे टर्म(para टीचर) लिखित रिकॉर्ड है इन शिक्षामित्रो के लिए, या ये भी 2010 के बाद आप लोगो ने स्वयं बना लिया,क्या शिक्षामित्रो और रिक्रूटमेंट ऑथरिटी को पता है para टीचर क्या होता है?

काइंडली describe the डेफिनेशन ऑफ पर टीचर रेगार्डिंग सर्विस रूल। एंड हाऊ इटस इम्पोज़ ऑन sikshamitras?

SM नियुक्ति के विज्ञापन का अवलोकन, माननीय न्यायाधीश द्वय द्वारा। नियुक्ति आर्डर /प्रक्रिया के कागजात दोनों जस्टिस देख रहे। आरक्षण नियम का पालन नहीं हुआ इनकी नियुक्ति में - कोर्ट, विज्ञापन में कमिया पाई गई।

माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले पर टिका है 175000 परिवारों का भविष्य

05 मई 2017: अन्य स्रोत से: मैं समायोजित शिक्षामित्रों के प्रकरण को एक अलग दृष्टि से देखता हूँ।मुझे लगता है ये कानून और न्याय के बीच की लड़ाई है। क़ानूनी तौर पर यह केस जरूर कमजोर है,परन्तु न्याय के तराजू पर बेहद मजबूत है।माननीय न्यायधीशों ने अगर क़ानून का ऑपरेशन किया तो इसकी गाज़ न्याय की बाट जोह रहे इन नवोदित शिक्षकों पर गिर सकती है।इसके विपरीत अगर वो न्याय पर जायेंगे तो उन्हें इनको हरी झंडी देनी पड़ेगी।

माननीय जजों को सोचना होगा कि आज के हालात में पौने दो लाख लोग जहाँ खड़े हैं उन्हें यहाँ कौन लाया है ? इस मामले में शिक्षामित्रों का दोष कहाँ है ?
संविधान की शपथ लेने वाली सरकार की तरफ से अगर कोई गलती हुई है तो क्या इसकी सजा शिक्षामित्रों को मिलनी चाहिए ?कप्तान को आप छोड़ देंगे और बाकियों को सूली पर लटका देंगे।ये कहाँ का इंसाफ होगा ?

पद और पैसा किसे अच्छा नहीं लगता। किसी को ख़जूर पर बिठाकर आप जमीन पर नहीं पटक सकते !
पन्द्रह वर्षों से भी अधिक समय से लगातार काम करने वाले इन लोगों को आप उम्र के इस पड़ाव पर घर नहीं बिठा सकते। ऐसा करना इनके मान सम्मान और स्वाभिमान के साथ क्रूर मजाक होगा।
इनके विरुद्ध होने वाले फैसले से क़ानून की जीत हो सकती है पर निश्चय ही ये न्याय की एक बड़ी हार होगी। मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि लाखों प्रतिभाशाली युवाओं का हक़ मारा गया है पर इसके लिए ये लोग ज़िम्मेदार नहीं हैं।

वोट की राजनीति इन सारी समस्याओं की जड़ में हैं। कार्यपालिका के कृत्यों और गुनाहों के लिए इतने परिवारों को मानसिक और आर्थिक आघात पहुँचाना एक तरह का judicial murder होगा।
उच्चतम न्यायालय को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 142 की शक्तियों का प्रयोग इस वाद में करना चाहिए। कार्यपालिका को भविष्य के लिए हिदायत देते हुए इसमें समायोजित शिक्षामित्रों को राहत दी जानी चाहिए। ये मेरी निजी राय है। मेरी शुभकामनायें समायोजित शिक्षकों के साथ हैं।

Thursday, 4 May 2017

सरकार ने शिक्षा मित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का किया विरोध

04 मई 2017, जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को शिक्षा मित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन रद करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का सुप्रीम कोर्ट में विरोध किया। प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से कहा गया कि नियम कानूनों के तहत शिक्षा मित्रों का समायोजन किया गया था। शिक्षा मित्रों की ओर से भी कोर्ट मे दलीलें रखी गईं। मामले में शुक्रवार को फिर सुनवाई होगी। यह मामला उत्तर प्रदेश में 170000 शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित किये जाने का है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 सितंबर 2015 को शिक्षा मित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन निरस्त कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि टीईटी पास किए बगैर शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक नहीं बनाया जा सकता। प्रदेश सरकार, बेसिक शिक्षा परिषद और शिक्षा मित्रों ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट आजकल मामले पर नियमित सुनवाई कर रहा है।

मंगलवार को बहस के दौरान प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद ने शिक्षा मित्रों की नियुक्ति और समायोजन का पूरा ब्योरा कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि तीन चरणों में शिक्षा मित्रों की नियुक्ति हुई थी। 1999 में 10000 फिर वर्ष 2000 में 70000 और वर्ष 2005 में 90000 शिक्षामित्रों की नियुक्ति हुई। कुल 170000 शिक्षा मित्रों की नियुक्ति हुई। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या पद के लिए विज्ञापन निकाला गया था और उसमें क्या मानक थे। वकील ने कहा कि हां, विज्ञापन निकला था। कोर्ट ने अगली सुनवाई पर भर्ती का निकाला गया विज्ञापन पेश करने को कहा है। शिक्षामित्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी और शांतिभूषण ने बहस की। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने आदेश देने से पहले शिक्षा मित्रों को नोटिस जारी नहीं किया था।

Wednesday, 3 May 2017

UPTET SHIKSHAMITRA NEWS: आज की सुनवाई खत्म, 5 मई से लगातार हियरिंग होगी, 9 मई को शाम तक फैसला संभव

03 मई 2017: आज की सुनवाई खत्म, अगली सुनवाई 5 मई को 2 बजे से 4 बजे तक। आवश्यकता पड़ने पर उसके बाद की सुनवाई सोमवार ,मंगलवार को जारी रह सकती है।

आज की सुनवाई में वेंकट रमणी जी ने कल का सरकार के वकील का डैमेज कण्ट्रोल किया फिर राम जेठमलानी जी ने उस डैमेज कण्ट्रोल को पूरी तरह दुरुस्त किया।उसके बाद शांति भूषण जी ने शिक्षा मित्रों को बैकफुट से फ्रंट फुट पर लाकर खड़ा कर दिया। आज इन तीनों वकीलों ने ही पूरे दिन अपनी बात रखीं

मुख्य बिंदु डैमेज कंट्रोल के अलावा हाई कोर्ट के निर्णय को कठघरे में खड़ा किया जाना रहा। कुल मिलाकर दोनों वरिष्ठ वकीलों ने आज केस को बहुत सम्भाला। और जजों को शिक्षा मित्रों के बारे में सोचने को मजबूर किया।

आज समय समय पर कोर्ट ने शिक्षामित्रों से सम्बंधित दस्तावेज मांग कर देखते रहे है और शिक्षा मित्रों के याचियों की बात भी पूछी गयी तथा समायोजित में कितने टेट पास है। ये भी कोर्ट द्वारा पूछा गया।

5 से पुनः सुनवाई 2 बजे से होगी और शांति भूषण जी से कंटीन्यू होगा। 5 को कोई फैसला नहीं आया तो 8  व 9 मई को भी सुनवाई जारी रहेगी।

UPTET SHIKSHAMITRAरामजेठमलानी सर शिक्षामित्रों के पक्ष में बोलते हुए: न्यूज़ from Other source

वरिष्ठ वकील श्री राम जेठमलानी जी शिक्षामित्रों के पक्ष में बहस करते हुए।

शिक्षामित्रों की नौकरी पर संकटः सुप्रीम कोर्ट का यूपी के 1.75 लाख शिक्षामित्रों को हटाने का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि यूपी में शिक्षण कार्य कर रहे पौने दो लाख शिक्षामित्रों को हटाकर उन्हें नए सिरे से भर्ती
करने का आदेश दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि नई भर्ती होने तक मौजूदा शैक्षणिक सत्र तक शिक्षामित्रों को कार्य करने दिया जाएगा और जैसे ही नई भर्ती संपन्न होगी उन्हें उससे बदल दिया जाएगा।

जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने मंगलवार को ये टिप्पणियां तब की जब यूपी के एएजी अजय कुमार मिश्रा और नलिन कोहली ने कहा कि यदि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट के फैसले को कोर्ट सही मान रही है तो हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन हम 22 सालों से काम कर रहे पौने दो लाख लोगों का क्या करेंगे। कोर्ट ने कहा कि इसका समाधान हम बताएंगे।

पीठ ने कहा कि आप छह माह के अंदर नई भर्ती कीजिए। इस भर्ती को दिसंबर तक पूरा कीजिए। ऑनलाइन आवदेन सिस्टम से यह संभव है। इसके बाद अगले वर्ष मार्च तक नियुक्तियां कीजिए। तब तक शिक्षामित्रों को अध्यापन करने दीजिए। उन्हें इस भर्ती में बैठने का पूरा अधिकार होगा, उनके लिए उम्रसीमा का बंधन नहीं होगा, क्योंकि वह पहले से पढ़ा रहे हैं। जहां तक उन्हें दी जाने वाली वरिष्ठता का सवाल है तो यूपी सरकार नियम बनाकर उसे तय कर सकती है। इसमें कोई समस्या नहीं है।

नियुक्तियां असंवैधानिक
कोर्ट ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्तियां संवैधानिक के खिलाफ हैं क्योंकि आपने बाजार में मौजूद प्रतिभा को मौका नहीं दिया और उन्हें अनुबंध पर भर्ती करने के बाद उनसे कहा कि आप अनिवार्य शिक्षा हासिल कर लो। पीठ ने कहा कि यह बैकडोर एंट्री है जिसे उमादेवी केस (2006) में संविधान पीठ अवैध ठहरा चुकी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश को स्टे कर दिया था।

दूरदराज शिक्षा देने के लिए की थी भर्ती
यूपी सरकार ने कहा कि 1999 में शिक्षामित्रों की भर्ती प्रदेश के दूरदराज केक्षेत्रों में बालकों को बेसिक शिक्षा देने के लिए की गई थी। यह एक कल्याणकारी कदम था जिसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि 22 साल से चल रही यूपी सरकार की इस नीति को चुनौती नहीं दी है। जिन्होंने चुनौती दी है उनकी संख्या लगभग 200 है और उन्हें सरकार नौकरी में लेने को तैयार है।

अच्छी मंशा आंखों का धोखा है
कोर्ट ने कहा हम मंशा पर सवाल नहीं उठा रहे हैं हम यह पूछ रहे हैं कि आपने शिक्षामित्रों को योग्यता शिक्षा हासिल (बीएड,बीटीसी, दूरस्थ बीटीसी और टीईटी) करने के लिए किस नियम के तहत अनुमति दी। क्या आपने इसके लिए कोई विज्ञापन निकाला था क्या कोई चयन प्रक्रिया तय की थी। आपकी कल्याणकारी मंशा कुछ नहीं, आंखों का धोखा मात्र है, आपने नियमों के विरुद्ध भर्ती की है। जस्टिस ललित ने पूछा आप इस नतीजे पर किस आधार पर पहुंचे कि प्रदेश में पौने दो लाख शिक्षामित्रों की जरूरत है और आपने मार्केट में मौजूद प्रतिभा को महरूम कैसे किया। क्या इसे निष्पक्ष प्रतियोगिता कहा जा सकता है। आप कह रहे हैं इसे किसी ने चुनौती नहीं दी। जब तक ये अनुबंध था किसी को समस्या नहीं थी लेकिन जब आप नियमित करने लगे तक समस्या हुई। बिना विज्ञापन आप नियमित कैसे कर सकते हैं।

कोर्ट मामले को आज की समाप्त करना चाहता था लेकिन कुछ शिक्षामित्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी ने वह कुछ बहस करेंगे। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को बचकाना बताया और कहा कि उन्होंने यह नहीं देखा कि शिक्षामित्र रखने को उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा देना था। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसला देते समय एक भी शिक्षामित्र को नोटिस नहीं दिया था। कोर्ट का समय पूरा होने के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी इसलिए कोर्ट ने मामला कल तक के लिए स्थगित कर दिया।

Tuesday, 2 May 2017

SHIKSHAMITRA: शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई रहेगी जारी। फ़र्ज़ी अफवाहों से बचे। कोई समायोजन रद्द नही किया गया है।

02 मई 2017: हियरिंग कल भी कंटिन्यू रहेगी , शिक्षामित्र से ही पुनः सुना जाएगा। शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई रहेगी जारी। फ़र्ज़ी अफवाहों से बचे. कोई समायोजन रद्द नही किया गया है।

जज साहब ने SM, B.ED & BTC सभी को खुली प्रतियोगिता के द्वारा मौका देने कि बात कही।

UPTET शिक्षामित्र, सुप्रीम कोर्ट केस Update


आज शिक्षामित्र का केस सुबह करीब 11:50 पर शुरू हुआ। बहस लगातार जारी। अब लंच के बाद यानी दोपहर 2 बजे से पुनः बहस जारी रहेगी।

मामला शिक्षामित्रों के विरुद्ध जाता हुआ दिख रहा है।

सभी लोगो से अपील है कि फैसला किसी के भी पक्ष में आये कृपया कोई भी किसी का उपहास न उड़ाए एवं कोई भी किसी भी तरह का गलत कदम न उठाएं, क्यों कि आप अपने परिवार एवं दोस्तों के लिए अमूल्य हैं।

टी ई टी वालो से विन्रम निवेदन है कि वो सोशल मीडिया या अन्य माध्यमो से किसी पर गलत टिपण्णी न करें। कृपया शब्दो पर संयम रखें।