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Wednesday, 26 April 2017

सुप्रीमकोर्ट में शिक्षक भर्ती केस मेटर तीन पार्ट में बंटा , पहले बिंदु पर फाइनल सुनवाई होगी आरम्भ

मेटर तीन पार्ट में क्लासिफाइड-

1- Base of Selection
2. Shikshamitra Matter
3. Writ No. 167 and other connected writ

लंच के बाद से पहले बिंदु पर फाइनल सुनवाई आरम्भ होगी। सुनवाई लंच के बाद 2 बजे के बाद फिर से होगी। अभी सुनवाई स्थगित.. भीड़ की वजह से केस लंच के बाद सुना जाएगा।। चल रहे केस के बाद पुनः सुनवाई।जिस क्रम से हाई कोर्ट का आर्डर आया है उसी क्रम से सुनवाई होगी। लंच के बाद कंटीन्यू सुनवाई होगी। पहले टेट और नॉन टेट विवाद निपटाया जायेगा, फिर शिक्षामित्र और फिर जूनियर मामला सुनाजायेगा। जिस कर्म से हाई कोर्ट के आदेश हुए है उसी क्रम से निस्तारित किया जायेगा।

Shikshamitra Latest News

पहले सिविल अपील मुख्य विवाद 12 वां बनाम 15 वां सुना जाएगा क्रम से उसके बाद आनंद बनाम स्टेट आफ यूपी सुना जाएगा। (SM मामला) सभी सुनवाई सिस्टेमेटिक ढंग से सुना जाएगा। लंच बाद पुनः शुरू होगी सुनवाई सबसे पहले मुख्य अपील 4347 इसके बाद शिक्षा मित्र मैटर फिर याची रिलीफ पर बहस होगी। केस अंतिम निस्तारण की ओर अग्रेसर।

UPTET SHIKSHAMITRA बिना किसी सुनवाई के मैटर अड्जर्नड अगली सुनवाई लंच के बाद या जुलाई में, आज कोई बहस नहीं हुई

UPTET SHIKSHAMITRA बिना किसी सुनवाई के मैटर अड्जर्नड अगली सुनवाई लंच के बाद या जुलाई में, आज कोई बहस नहीं हुई. सरकार ने अपने एफिडेविड में शिक्षामित्रों को शिक्षको के स्थान पर दिखाया है , प्रशिक्षित अवशेष शिक्षा मित्रो का भी जिक्र किया है। कृपया आगे की जानकारी के लिए ब्लॉग विजिट करते रहे.

यूपी कैबिनेट के फैसले: महापुरुषों के नाम पर स्कूल और दफ्तर नहीं होंगे बंद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आज लोकभवन में कैबिनेट की चौथी बैठक हुई। बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री श्रीकांत ने कहा, जहां-जहां प्राइवेट जमीन पर कब्जे हुए हैं शासन प्रशासन अभी तक उनकी मदद करता रहा था अब शासन प्रशासन उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा।

अगर पुलिस ने ढील दी तो थानाध्यक्षों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। ‌इसका मतलब है कि यूपी में अब कानून का राज्य है। हमें सुनाई दिया है कि जबसे बीजेपी सरकार आई है लोगों ने ऐसी संपत्तियों से कब्जा खुद छोड़ दिया है और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद इस पर और तेजी आ जाएगी। उन्होंने कहा कि धर्म की आड़ में भी कब्जे नहीं होंगे। एंटी भू माफिया टास्क फोर्स के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कब्जों की शिकायतों को लेकर पोर्टल भी बनाया जाएगा।

वहीं महापुरुषों के नाम पर स्कूल और सरकारी दफ्तरों में छुट्टियां रद्द करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। संभावना जताई जा रही है कि ये छुटियाँ होंगी निरस्त :-
1.परशुराम जयंती
2.चंद्रशेखर जयंती,
3.महाराणा प्रताप जयंती
 4.कर्पूरी ठाकुर जयंती,
5.महर्षि कश्यप एवं महाराज गुह्य जयंती,
6.सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती,
7.ऊदा देवी शहीद दिवस
8.महाराजा अग्रसेन जयंती
9.हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी गरीब नवाज का उर्स
10.चेटीचंद
11.वाल्मीकि जयंती,
12.संत रविदास जयंती, 13.अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस,
14.डॉ़ अम्बेडकर जयंती
15.चौधरी चरण सिंह जयंती

Tuesday, 25 April 2017

सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर किया यूपी सरकार का प्रस्ताव, यूपी पुलिस में हर साल भर्ती होंगे 30 हजार सिपाही, 3200 एसआई: सरकार पुलिस में खाली 1.50 लाख पदों को 4 साल में भर्ती कर भरे

यूपी सरकार पुलिस में खाली 1.50 लाख पदों को 4 साल में भरे। इससे लॉ ऐंड ऑर्डर की स्थिति में सुधार होगा। अगर इस योजना के तहत यूपी में भर्ती नहीं हुई तो इसके लिए यूपी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (होम) जिम्मेदार होंगे। - सुप्रीम कोर्ट

पुलिस में खाली पड़े 1.50 लाख पद 2023 तक भरे जाएंगे। इसके लिए सालाना 3200 सब इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रिया 2018 से शुरू होगी। इसके अलावा इस समय यूपी में एक लाख 87 हजार 790 सिपाही कार्यरत हैं और 1 लाख 36 हजार 335 पद खाली हैं। खाली पदों में से 34 हजार 716 सिपाहियों की भर्ती का मामला हाई कोर्ट में पेंडिंग है। बाकी बचे करीब एक लाख पदों पर भर्ती अगस्त से शुरू हो जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में दो साल का वक्त लगता है। ऐसे में हर साल 30 हजार पद भरकर 2021 तक सभी वैकंसी भर दी जाएंगी। अदालत ने बिहार, झारखंड व वेस्ट बंगाल द्वारा पेश किए गए रोडमैप को भी स्वीकार कर लिया।

• एनबीटी ब्यूरो, नई दिल्ली: यूपी पुलिस में खाली पड़े पदों पर भर्ती के लिए हर साल 3200 सब इंस्पेक्टर और 30 हजार सिपाही भर्ती किए जाएंगे। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह रोडमैप रखा है। सरकार के रोड मैप को कोर्ट ने मंजूरी दे दी है।

यूपी, बिहार और चार अन्य राज्यों में पुलिस के खाली पड़े पदों पर पिछली सुनवाई में कोर्ट ने चिंता जताई थी। साथ ही सभी राज्यों के गृह सचिवों को सोमवार को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने या अपने किसी अफसर को भेजने का आदेश दिया था। कोर्ट ने राज्यों से पूछा था कि उनके पास क्या रोडमैप है/ किस तरह से ये वैकन्सी भरी जाएंगी, इस बारे में कोर्ट को बताएं।

यूपी सरकार की ओर से पेश एडवोकेट रवि पी. महरोत्रा ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुआई वाली बेंच के सामने सोमवार को पुलिस भर्ती को लेकर तैयार किया गया रोडमैप पेश किया।

महिलाओं को मिलेगी घर के पास तैनाती : 5 . 85 लाख शिक्षकों के लिए स्थानांतरण नीति जल्द

5. 85 लाख शिक्षकों के लिए स्थानांतरण नीति 

UPTET 72825 और शिक्षामित्र वैधता पर मा० उच्चत्तम न्यायालय में 26 अप्रैल को सुनवाई सुनिश्चित : हिमांशु राणा

अन्य स्रोत से----

नमस्कार मित्रों ,
जैसा कि आपको विदित है कि अपना केस मा० उच्चत्तम न्यायालय में 26 अप्रैल को सुना जाना सुनिश्चित है,
उसी क्रम में कल आपकी इस टीम द्वारा राज्य एवं केंद्र सरकार के साथ-साथ मा० न्यायालय को हर तरह से बीएड वालों के हित में आदेश करने हेतु न्यायिक तौर पर शोध करने को विवश करने के लिए बीएड वालों की नियुक्ति हेतु समय सीमा बढाने एवं टीईटी जिसकी वैधता का जिक्र मा० न्यायाधीश श्री दीपक मिश्र जी ने 17 नवम्बर 2017 के आदेश में किया भी था को बढाने हेतु दिशा/निर्देश अंतरिम प्रार्थना पत्र (डायरेक्शन अप्लिकेशन) आपकी याचिका 167/2015,107/2016 एवं 120/2016 में डाल दिया गया है |

सोती शिक्षिका के फोटो वायरल करने पर घिरे बीएसए: शिक्षक संगठनों के विरोध में आने पर बीएसए बैकफुट पर

जागरण, लखीमपुर: कक्षा में सोती शिक्षिका का फोटो खिंचवाकर वाहवाही लूट रहे बीएसए फोटो को लेकर खुद घिर गए । शिक्षिका का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर शिक्षक संगठनों ने बीएसए को कठघरे में खड़ा कर दिया। साथ ही अन्य लोगों ने भी निंदा की। अब बीएसए शिक्षिका को निलंबित किए जाने की बात को भी खारिज कर रहे हैं। इतना ही नहीं महिला का फोटो वायरल करने वाला स्टेनो अब लिखित में माफी मांगता फिर रहा है। बीएसए से मिले संघ के जिलाध्यक्ष संजीव त्रिपाठी ने इसे निजता के हनन का मामला बताया है। कई अन्य संगठनों ने भी इस मामले पर अपनी नाराजगी जताई है। उनका कहनाहै कि इस तरह फोटो खिंचाना और व्हाट्स ग्रुप पर वायरल करना शिक्षिका का अपमान है।इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ये था मामला
बुधवार को बीएसए संजय शुक्ला ने उन्नीस स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था। यहां बीएसए को अजब-गजब मामले दिखाई दिए। ऐसे ही सिकंदराबाद के एक स्कूल में महिला टीचर अपनी बच्ची को गोद में लेकर सोती हुई मिली। साहब के स्टेनो ने उसका फोटो खींच लिया। अगले ही पल वह शिक्षा विभाग के एक व्हाटसएप ग्रुप से बाईपास होते हुए जिले के कई ग्रुपों में वायरल हो गई। उनके आफिस से बाकायदा इस बात की पुष्टि की जाने लगी कि ये घटना हुई है और उस टीचर को निलंबित किया गया है।

रातोंरात बदले हालात
बुधवार दोपहर बाद से वायरल होने लगी उस फोटो को लेकर गुरुवार सुबह तक हालात बदल चुके थे। न जाने कितने खबरिया चैनल बीएसए की बाइट लेने उनके दफ्तर के बाहर जमा हो गए। शिक्षक नेता लासमबंद होकर दफ्तर पहुंच गए मामला उल्टा पड़ता देख बीएसए साहब ने ये तक कह दिया कि उस टीचर को निलंबित ही नहीं किया गया। इतना ही बीएसए के स्टेनो ने बाकायदा लिखित में ग्रुप पर अपना माफीनाम भी डाला और टीचर से माफी मांग ली। इधर भाजपा नेता व जिला पंचायत सदस्य अनूप शुक्ला ने इसे नारी के अपमान का मुददा बताया और बीएसए के इस्तीफे की मांग कर डाली। हंिदूू जागरण मंच ने भी इस घटना की निंदा करते हुए बीएसए पर कार्रवाई की मांग की है। मंच के अध्यक्ष राहुल तिवारी व मंत्री संजीव सनातन ने ऐसी घटनाओं को रोकने की भी मांग की है।

शिक्षामित्रों को सीएम ने दिया पैरवी का आश्वासन: शिक्षामित्रों को टीईटी से छूट और 72825 मामले की 26 को होनी है सुनवाई

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में उनके मामले में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के पैनल के जरिये मजबूत पैरवी करेगी। सोमवार को वह अपने सरकारी आवास पर उप्र दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहे थे। शिक्षामित्रों को टीईटी से छूट दिये जाने और 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों के मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 26 अप्रैल को करेगा। संघ के अध्यक्ष अनिल यादव की अगुआई में मुलाकात करने गए प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से इस मामले में सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी करने का अनुरोध किया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला - आरक्षितों को सिर्फ कोटे में ही नौकरी, सामान्य श्रेणी में नहीं

22 -अप्रैल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आरक्षित वर्ग में नौकरी के संबंध में एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी, चाहे उसने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक क्यों न हासिल किए हों।

दोहरा लाभ नहीं :  जस्टिस आर भानुमति और जस्टिस एएम खानविल्कर की पीठ ने कहा कि एक बार आरक्षित वर्ग में आवेदन कर उसमें छूट और अन्य रियायतें लेने के बाद उम्मीदवार आरक्षित वर्ग के लिए ही नौकरी का हकदार होगा। उसे समान्य वर्ग में समायोजित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह फैसला आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार के मामले में दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसे सामान्य वर्ग में नौकरी दी जाए, क्योंकि उसने लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।

नियम का हवाला : कोर्ट ने कहा कि डीओपीटी की 1 जुलाई 1999 की कार्यवाही के नियम तथा ओएम में साफ है एससी/एसटी और ओबीसी के उम्मीदवार को, जो अपनी मेरिट के आधार पर चयनित होकर आए हैं, उन्हें आरक्षित वर्ग में समायोजित नहीं किया जाएगा।उसी तरह जब एससी/एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए छूट के मानक जैसे उम्रसीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, लिखित परीक्षा के लिए अधिक अवसर दिए गए हों तो उन्हें आरक्षित रिक्तियों के लिए ही विचारित किया जाएगा। ऐसे उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए अनुपलब्ध माने जाएंगे।