लखनऊ : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में हथियार बनेगी। यदि केंद्र सरकार के किसी विभाग, कंपनी या सरकारी बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी कोई काम करने की बजाय घूस (रिश्वत) मांगें तो सीबीआइ को शिकायत कर कार्रवाई कराई जा सकती है। सीबीआइ ने खुद इसकी पहल करते हुए लैंड लाइन और मोबाइल फोन के नंबर जारी किए हैं।
सरकार यह संदेश देने में जुटी है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है। ऐसे में केंद्र सरकार के उपक्रमों में भी आमजन के साथ रिश्वतखोरी बंद करने पर जोर दिया गया है। सीबीआइ इस दिशा में आगे आई है। सीबीआइ के पुलिस अधीक्षक प्रणव कुमार ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार के किसी विभाग, कंपनी, सरकारी बैंक का कोई कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत मांगे तो सीबीआइ लखनऊ को फोन नंबर 0522-2234926 तथा 9415012635 पर शिकायत दर्ज कराएं या एसएमएस करें। यह नंबर जारी होने से आमजन को सीबीआइ से सीधे जुड़ने का रास्ता खुल गया है। इसमें न तो कहीं किसी के पास जाने की झंझट है और न ही किसी सोर्स-सिफारिश की जरूरत है। ऐसा भी नहीं कि सीबीआइ ने यह व्यवस्था पहली बार की है।
पहले भी समय-समय पर लोगों को जागरूक करते हुए सीबीआइ ने अभियान चलाया और उसका असर देखने को मिला है। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का एलान किया था। संकल्प पत्र में भी यह साफ कहा गया कि सरकार बनने पर भाजपा भ्रष्टाचार के कलंक को उखाड़ फेंकेगी। भाजपा सरकार बनने के बाद पिछले 15 वर्षो में हुए घोटालों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। बसपा शासन में बेची गई चीनी मिलों से लेकर सपा शासन में समाजवादी पेंशन, आगरा एक्सप्रेस वे और गोमती रिवर फ्रंट निर्माण में घोटालों और अनियमितता की जांच शुरू हो गई है। इस बीच और भी कई मामलों की फाइलें खंगाली जा रही हैं। सीबीआइ यादव सिंह समेत भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच में जुटी है।

