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Monday, 1 May 2017

घूस मांगने वालों की सीबीआइ में करें अब शिकायत, भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआइ की मुहिम, इन नम्बरों पर करें फोन और एसएमएस

लखनऊ : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में हथियार बनेगी। यदि केंद्र सरकार के किसी विभाग, कंपनी या सरकारी बैंकों के कर्मचारी और अधिकारी कोई काम करने की बजाय घूस (रिश्वत) मांगें तो सीबीआइ को शिकायत कर कार्रवाई कराई जा सकती है। सीबीआइ ने खुद इसकी पहल करते हुए लैंड लाइन और मोबाइल फोन के नंबर जारी किए हैं।

सरकार यह संदेश देने में जुटी है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाना है। ऐसे में केंद्र सरकार के उपक्रमों में भी आमजन के साथ रिश्वतखोरी बंद करने पर जोर दिया गया है। सीबीआइ इस दिशा में आगे आई है। सीबीआइ के पुलिस अधीक्षक प्रणव कुमार ने कहा है कि यदि केंद्र सरकार के किसी विभाग, कंपनी, सरकारी बैंक का कोई कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत मांगे तो सीबीआइ लखनऊ को फोन नंबर 0522-2234926 तथा 9415012635 पर शिकायत दर्ज कराएं या एसएमएस करें। यह नंबर जारी होने से आमजन को सीबीआइ से सीधे जुड़ने का रास्ता खुल गया है। इसमें न तो कहीं किसी के पास जाने की झंझट है और न ही किसी सोर्स-सिफारिश की जरूरत है। ऐसा भी नहीं कि सीबीआइ ने यह व्यवस्था पहली बार की है।

पहले भी समय-समय पर लोगों को जागरूक करते हुए सीबीआइ ने अभियान चलाया और उसका असर देखने को मिला है। भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का एलान किया था। संकल्प पत्र में भी यह साफ कहा गया कि सरकार बनने पर भाजपा भ्रष्टाचार के कलंक को उखाड़ फेंकेगी। भाजपा सरकार बनने के बाद पिछले 15 वर्षो में हुए घोटालों और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। बसपा शासन में बेची गई चीनी मिलों से लेकर सपा शासन में समाजवादी पेंशन, आगरा एक्सप्रेस वे और गोमती रिवर फ्रंट निर्माण में घोटालों और अनियमितता की जांच शुरू हो गई है। इस बीच और भी कई मामलों की फाइलें खंगाली जा रही हैं। सीबीआइ यादव सिंह समेत भ्रष्टाचार के कई मामलों की जांच में जुटी है।

Friday, 28 April 2017

CBSE : राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा साल में एक बार करने को सीबीएसई तैयार

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) वर्ष में एक बार कराने का प्रस्ताव मानव संसाधन विकास मंत्रलय को भेजा है। पात्रता परीक्षा कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के लिए शिक्षकों की भर्ती से संबंधित योग्यता की परीक्षा है।

ज्ञात हो कि परीक्षा जुलाई में कराने को लेकर संशय पर यूजीसीके मुख्यालय पर जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों सहित अन्य छात्रों ने प्रदर्शन किया था। हालांकि, यह बताया जा रहा है कि इस वर्ष जुलाई में होने वाली परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता को समाप्त करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फैसला किया है कि सीबीएसई ही यह परीक्षा कराएगी। सीबीएसई इस परीक्षा से संबंधित सभी पहलुओं पर ध्यान दे रहा है। पंजीकृत उम्मीदवारों में से केवल 17 फीसद ही परीक्षा के लिए आते हैं और उनमें से केवल चार फीसद ही परीक्षा उत्तीर्ण कर पाते हैं।

66 हजार सहायक शिक्षकों से नहीं होगी छेड़छाड़, सुप्रीम कोर्ट से खुशखबरी के संकेत

अमर उजाला, नयी दिल्ली: प्रदेश के 66 हजार सहायक शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से खुशखबरी के संकेत आये हैं। कोर्ट ने गुरुवार को सहायक शिक्षक भर्ती मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि भर्ती हो चुके करीब 66 हजार सहायक शिक्षकों को नहीं छेड़ा जाएगा। कोर्ट भविष्य में भर्ती के मानक तय करने पर अपना फैसला सुनाएगा। दूसरी तरफ शिक्षा मित्रों का मामला सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य मामले से अलग कर दिया है और शिक्षा मित्रों के मामले पर कोर्ट दो मई को सुनवाई करेगा।यह मामला उप्र के प्राथमिक स्कूलों में 2011 की सहायक शिक्षक भर्ती योजना का है जिसमें 72825 शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। भर्तियां हुईं लेकिन 20 नवंबर 2013 को हाई कोर्ट ने योग्यता मानदंडों से जुड़ा राज्य सरकार का 15वां संशोधन रद करते हुए भर्तियां निरस्त कर दी थीं। यह होना है कि सहायक शिक्षकों की भर्ती का मानदंड टीईटी होगा या फिर एकेडेमिक मेरिट मानक होगा। मामले में उप्र सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।



शिक्षामित्रों की सुनवाई 2 मई को, डेढ़ लाख शिक्षामित्र हाईकोर्ट के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद से सुप्रीमकोर्ट के फैसले का कर रहे इंतजार


शिक्षामित्रों के शिक्षक पद पर समायोजन केस में सुनवाई 2 मई को होगी। प्रदेश में अब तक डेढ़ लाख के लगभग शिक्षामित्रों को नियुक्ति दी गई है। इसे हाईकोर्ट ने अवैध ठहराया था और कहा था कि बिना टीईटी पास लोगों को शिक्षक के रूप में निुयक्त नहीं किया जा सकता।

नई दिल्ली :  सुप्रीम कोर्ट ने यूपी टीईटी व शैक्षणिक मेरिट पर शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने कहा जो लोग अध्यापन कर रहे हैं वे करते रहेंगे। पर जो नई भर्ती होंगी उसके लिए कोर्ट दिशा-निर्देश जारी करेगा। जस्टिस आदर्श गोयल और यूयू ललित की पीठ ने गुरुवार को विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। शिक्षक योग्यता परीक्षा (टीईटी ) पास उम्मीदवार टीईटी के साथ शैक्षणिक योग्यता जोड़ने के नियम (13 और 15) का विरोध कर रहे हैं। यूपी सरकार ने नियम बनाया था कि सिर्फ टीईटी पास करना ही पर्याप्त नहीं होगा इसके लिए उनका शैक्षणिक रिकार्ड भी देखा जाएगा और उसके आधार पर ही मेरिट बनेगी। फैसले को चुनौती दी थी: यह मामला हाईकोर्ट गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा नियम बनाने का हक केंद्र को है न कि यूपी को। कुछ ने इसे चुनौती दी थी।

बेटियों के जन्म पर 50 हजार रुपये का बॉन्ड देगी योगी सरकार

गरीब परिवारों को बेटियों के जन्म पर सूबे की सरकार 50 हजार रुपये का बॉन्ड देगी। इसके लिए महिला कल्याण विभाग भाग्यलक्ष्मी योजना का खाका तैयार कर रहा है। इसमें बेटियों को जन्म देने वाली मां को भी 5100 रुपये दिए जाएंगे।

शीघ्र ही इस योजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। मुख्यमंत्री गरीब परिवारों को बेटियों के जन्म पर उन्हें प्रोत्साहन देने जा रहे हैं। ताकि, वे बेटियों को बोझ न समझें।
बेटियों का लालन-पोषण अच्छे ढंग से हो इसलिए उन्हें जन्म के समय 50 हजार रुपये का बॉन्ड दिया जाएगा। इस योजना के जरिये सरकार सूबे में घट रहे लिंग अनुपात को भी सुधारेगी।
सरकार भाग्यलक्ष्मी योजना के तहत बीपीएल परिवारों के साथ ही दो लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों को भी शामिल करने जा रही है। बॉन्ड के साथ बैंक की एफडी के विकल्प पर भी विचार हो रहा है।

क्या है भाग्यलक्ष्मी योजना

प्रदेश सरकार ने बेटियों के जन्म के समय 50 हजार रुपये का बॉन्ड देने की जो योजना तैयार की है, उसमें बेटियां जैसे-जैसे बड़ी होंगी वैसे-वैसे पैसा अभिभावकों को मिलता जाएगा।
कक्षा छह में आने पर बेटियों को तीन हजार रुपये, कक्षा आठ में आने पर पांच हजार रुपये, कक्षा 10 में पहुंचने पर सात हजार व इंटरमीडिएट में आने पर आठ हजार रुपये मिलेंगे।
इसी प्रकार,21 वर्ष की आयु में दो लाख रुपये अभिभावकों को दिए जाएंगे। सरकार यह भी देख रही है कि क्या कोई बॉन्ड जारी करने वाली कंपनी इससे ज्यादा रिटर्न दे सकती है।
इस पर महिला कल्याण की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री ने भाग्यलक्ष्मी योजना लॉन्च करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना का खाका तैयार किया जा रहा है। शीघ्र ही इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसका लाभ गरीब परिवारों को बेटियों के जन्म पर मिलेगा। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत बेटी के जन्म पर मां को भी 5100 रुपये की धनराशि दी जाएगी।

Thursday, 27 April 2017

सुप्रीम कोर्ट अपडेट : टेट बनाम ऐकडेमिक की सुनवाई पूर्ण, फैसला रिजर्व , 90 दिन के अंदर आऐगा फैसला

12वें बनाम 15वें/16वें अर्थात टेट बनाम ऐकडेमिक की सिविल अपील 4347-4375/2014 और उससे कनेक्टेड इम्लीडमेन्ट ऍप्लिकेशन्स की सुनवाई पूर्ण, फैसला रिजर्व। सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर हुई शिक्षक नियुक्तियों को ललित सर ने बहाल रखा। 90/105 के क्राईटेरिया खत्म, 82/90 टेट अंक पाने वाले सभी अर्ह। शिक्षक चयन प्रणाली में टेट वेटेज अनिवार्य। अब शिक्षामित्र व याचियों के परमादेश याचिकाओं का फाइनल निस्तारण मंगलवार को। सारे मेटर को डिसाइड करके जजमेंट एक साथ आएगा। कोर्ट योग्य अभ्यर्थियों के प्रति पूर्णतयः सकारात्मक हैं व 82/90 टेट तक के सभी अभ्यर्थी अर्ह/पात्र हैं। मंगलवार को केस पूर्णतयः निस्तारित हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट अपडेट

CA 4347-4375/2014 पर फैसला सुरक्षित, 90 दिन के अंदर आऐगा फैसला।

12वां संशोधन सुरक्षित.

शिक्षामित्रों नई डेट 2 मई.

समस्त अंतरिम आदेशों का पालन होगा।।

UPTET कोर्ट के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट सिक्योरटी और दिल्ली पुलिस के जवान तैनात। किसी भी बिना गाउन के एडवोकेट और एडवोकेट के क्लर्क के कोर्ट के अंदर जाने पर रोक। जैसा कि आपको पता है आज कोर्ट में TET से Related कई महत्वपूर्ण केस चल रहें हैं, जिस वजह से वह कोर्ट की सुरक्षा के अलावा दिल्ली पुलिस के सुरक्षा जवान भी तैनात कर दिए गए हैं।

आज कोर्ट न० 13 आइटम न० 14 में लगभग 11 से साढ़े 11 के बीच केस सुना जाएगा. मा० उच्चत्तम न्यायालय के परिसर में भी घुसने पर होगी पाबंदी

आज कोर्ट न० 13 आइटम न० 14 में लगभग 11 से साढ़े 11 के बीच मैटर सुना जाएगा | किसी का पास नहीं बनेगा और कल मा० उच्चत्तम न्यायालय के परिसर में भी घुसने पर पाबंदी होगी | शिक्षा मित्रों की ट्रेनिंग के विरुद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी कामा जी की ब्रीफिंग पूर्ण | आरटीई एक्ट (याची लाभ) एवं शिक्षा मित्र मेटर पर अधिवक्ता नंदन साहब को ब्रीफ करने के लिए कूच |

गौरतलब है की कल (26-04-2017) को कोर्ट के हॉल में याचियों की अत्यधिक भीड़ होने की वजह से माननीय जज साहब ने ऐसा आदेश दिया था की कल (27-04-2017) कोर्ट रूम में सारे पक्षों के वकीलों को छोड़कर और कोई भी मौजूद नहीं रहेगा.

Wednesday, 26 April 2017

सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के खिलाफ याचिका ख़ारिज

72825 सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के मामले में करीब 11 सौ सहायक अध्यापक को तदर्थ नियुक्ति  देने के खिलाफ याचिका हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है। इन सहायक अध्यापकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तदर्थ नियुक्ति दी जानी है, जिसकी प्रक्रिया जारी है।

हाई कोर्ट ने मामले में यह कहते हुए हस्तछेप से इंकार कर दिया कि याचीगण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है लिहाजा मामले में हस्तछेप का औचित्य नहीं है। ऋषि श्रीवास्तव और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सुनवाई की।

शिक्षा मित्रों ने अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ने सहायक अध्यापक भर्ती नियमावली में 15 वां संसोधन करके नियुक्तियों शैक्षणिक गुणांक के आधार पर करने पर लिया था। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हुई और खंडपीठ ने 15 वां संसोधन रद्द करते हुए नियुक्तियां TET प्राप्तांक पर करने का आदेश दिया। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की की गई इस दौरान लगभग 11 सौ अभियार्थी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कहा कि यदि हाई कोर्ट 15 वां संसोधन रद्द नहीं किया होता तो उनको शैक्षणिक गुणांक पर नियुक्ति  मिल गई होती। एस एल पी के लंबित रहने के दौरान उनको नियुक्ति दी जाये सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता अभियर्थियों को तदर्थ  रूप से सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति देने का दिया तथा कहा कि यह नियुक्तियां एस एल पी के निर्णयं पर निर्भर करेगी।

स्कूलों के नोटिस बोर्ड पर लगेंगे शिक्षकों के फोटो

परिषदीय और सहायताप्राप्त विद्यालयों में फर्जी शिक्षकों के पढ़ाने की शिकायतों पर केंद्र सरकार की भृकुटि तन गई है। केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रलय ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर परिषदीय और सहायताप्राप्त विद्यालयों में नियुक्त शिक्षकों की फोटो स्कूल के नोटिस बोर्ड पर लगाने के लिए कहा है। निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 24(1)(ए) में यह व्यवस्था है कि शिक्षक स्कूल में नियमित रहने के साथ समयबद्धता का भी पालन करेगा। यह बात और है कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक इस नियम की धज्जियां उड़ाते हैं। परिषदीय विद्यालयों में आमतौर पर यह शिकायतें मिलती हैं कि शिक्षक स्कूल में पढ़ाने नहीं आते। सुदूरवर्ती इलाकों के स्कूलों में ऐसी भी शिकायतें मिलती हैं कि स्कूल में नियुक्त शिक्षक पढ़ाने की बजाय खुद स्कूल से गायब रहते हैं और खंड शिक्षा अधिकारी व विद्यालय के प्रधानाचार्य से सांठगांठ कर अपनी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को प्रतिस्थानी के तौर पर स्कूल में पढ़ाने भेजते हैं। इसके लिए वे खंड शिक्षा अधिकारी की मुट्ठी गर्म करने के साथ अपने वेतन का कुछ हिस्सा उस व्यक्ति को भी देते हैं जो उनकी जगह बच्चों को पढ़ाने का काम करता हो। लंबे समय से यह गोरखधंधा चल रहा है और बेसिक शिक्षा विभाग इस पर प्रभावी तरीके से अंकुश नहीं लगा पा रहा है। एचआरडी मंत्रलय ने इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्य सरकार को अप्रैल 2016 में पत्र लिखा था और इसे रोकने के लिए की गई कार्यवाही की जानकारी मांगी थी। अगस्त 2016 में एचआरडी मंत्रलय ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर बताया कि इस बाबत 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जानकारी उपलब्ध करायी है लेकिन उप्र ने नहीं। लिहाजा एचआरडी मंत्रलय ने इस बार पत्र लिखकर राज्य सरकार से कहा है कि सभी परिषदीय और सहायताप्राप्त विद्यालयों के नोटिस बोर्ड पर स्कूल में तैनात शिक्षकों की फोटो उनकी श्रेणी के अनुसार लगायी जाएं। फर्जी अध्यापकों का गोरखधंधा रोकने की पहल केंद्र के एचआरडी मंत्रलय ने राज्य सरकार को भेजा पत्र।