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Friday, 12 May 2017

महिला हेडमास्टर की जगह पुरुष कर रहा था ड्यूटी: स्कूल में शिक्षक मिले न छात्र फर्जी हेडमास्टर हिरासत में, मुकदमा दो हजार रुपये में पढ़ाता था शिक्षक

12 मई 2017: बस्ती : विधायक के निरीक्षण में कप्तानगंज के नेवादा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका इंद्रावती चौधरी की जगह दूसरा व्यक्ति ड्यूटी करता मिला। विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ल की मौजूदगी में पुलिस ने उसे पकड़ लिया। एसडीएम एवं खंड शिक्षाधिकारी ने फर्जी शिक्षक बृजभान निवासी कौड़ीकोल, कप्तानगंज का बयान लिया और फिर देर शाम कप्तानगंज थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया। प्रधानाध्यापिका इंद्रावती कप्तानगंज के पूर्व ब्लाक प्रमुख राजमणि चौधरी की पत्नी हैं।गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ल नेवादा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय पहुंचे तो यहां न बच्चे मिले और न शिक्षक।

विधायक के स्कूल में पहुंचने की खबर फैली थोड़ी ही देर में वहां पढ़ाने वाले बृजभान पहुंच गए। उसने बताया कि वह यहां तैनात प्रधानाध्यापिका इंद्रावती चौधरी की जगह दो हजार रुपये मासिक के एवज में यहां पढ़ाता है। इसे प्रधानाध्यापिका ने ही रखा था। वह उनके पड़ोस के गांव का रहने वाला है। फर्जी शिक्षक को विधायक ने मौके पर ही मौजूद पुलिस के हवाले कर दिया गया।विधायक ने मौके से डीएमको इसकी जानकारी दी। थोड़ी ही देर में एसडीएम र्हैया हरिश्चंद्र सिंह और बीईओ राम तिलक वर्मा भी पहुंच गए।

दोनों अधिकारियों ने स्कूल के अभिलेख कब्जे में ले लिए। पकड़े गए फर्जी शिक्षक के साथ ही रसोइया राजमती और दूसरे सहायक अध्यापक मिथलेश गुप्ता का बयान भी लिया गया। बीईओ की तहरीर पर पुलिस ने प्रधानाध्यापिका इंद्रावती चौधरी और फर्जी शिक्षक बृजभान के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज किया। विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ल ने कहा वह कौड़ीकोल विद्यालय देखने गए थे। यहीं पर बताया गया नेवादा स्कूल कभी खुलता ही नहीं है और कोई जांच करने भी नहीं जाता।

वह गए तो सबकुछ खुलकर सामने आ गया। स्कूल में महज सात बच्चे पंजीकृत मिले। दो अध्यापकों की तैनाती की गई है। मिड डे मील तो यहां कभी बना ही नहीं। डीएम अर¨वद कुमार सिंह ने बताया विधायक की सूचना पर एसडीएम और बीईओ को मौके पर भेजा गया था। जांच में जो भी दोषी पाए गए हैं उनके खिलाफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं।

मानक से कम छात्रसंख्या वाले स्कूलों में समाप्त हो जाएंगे हेडमास्टर के पद

12 मई 2017: जिन सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या अनिवार्य शिक्षा अधिकार (आरटीई) के मानक के अनुसार वहां पर प्रधानाध्यापक के पद समाप्त किए जा सकते हैं। स्कूल चलो अभियान के बाद इसको कड़ाई से लागू करने पर विचार चल रहा है।

यह प्रावधान पहले से है लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। इस बार सरकार के सख्त रुख के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गये हैं। हाउस होल्ड सर्वे और स्कूल चलो अभियान पूरा होने के बाद स्कूलों में छात्र संख्या की समीक्षा होगी। आरटीई के मानक के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 151 और जूनियर विद्यालयों में 100 से अधिक छात्रसंख्या होने पर ही प्रधानाध्यापकों की तैनाती होगी। शासन का रुख भांपते हुए शिक्षक और प्रधानाध्यापक छात्र संख्या बढ़ाने में जुट गए हैं।

कुछ दिन पहले बेसिक शिक्षा परिषद ने आरटीई के मानक के अनुसार छात्रों और शिक्षकों की संख्या सभी जिलों से मांगी है। सूत्रों का कहना है कि कई सरकारी स्कूलों के यूडाएस (यूनिफाइड डिस्ट्रक्टि एजुकेशन सिस्टम) के डाटा से इस बात के संकेत मिले हैं। अभी कई स्कूलों में छात्र संख्या मानक से कम है।

शिक्षकों ने किया धरना, प्रदर्शन: अंशकालिक शिक्षकों को पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा देने की भी मांग उठाई

12 मई 2017:वाराणसी : समान कार्य के लिए समान वेतन, पुरानी पेंशन योजना की बहाली सहित विभिन्न मांगों को लेकर शिक्षकों ने गुरुवार को डीआइओएस कार्यालय पर दरी बिछा कर धरना-प्रदर्शन किया। वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में अंशकालिक शिक्षकों को पूर्णकालिक शिक्षक का दर्जा देने की भी मांग उठाई। शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा। 1सभा में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रदेशीय मंत्री व पूर्व शिक्षक विधायक डा. प्रमोद कुमार मिश्र ने कहा कि सूबे में 18 हजार वित्तविहीन विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में 1.92 लाख शिक्षक बंधुआ मजदूर की भांति कार्य कर रहे हैं। कई विद्यालयों के शिक्षकों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन मिल रहा है। 1वेतन की मांग करने पर प्रबंधतंत्र उन्हें निकालने की धमकी देता है। जबकि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक पूर्णकालिक शिक्षकों की भांति कार्य कर रहे हैं। ऐसे में समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों पर भी लागू किया जाय। अध्यक्षता संघ के जिलाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह, संचालन जिलामंत्री माया शंकर यादव ने किया। धरने में अनिल कुमार श्रीवास्तव, नयन लाल मिश्र, विनोद कुमार पाठक, गिरिजेश तिवारी सहित अन्य लोग शामिल थे। 1सरप्लस शिक्षकों की सेवा खतरे में1वाराणसी : माध्यमिक विद्यालयों में छात्र अनुपात में सरप्लस शिक्षकों की सेवा खतरे में है। शासन ने डीआइओएस से छात्रसंख्या में अनुपात में सृजित पद व कार्यरत सहायक अध्यापकों का विवरण मांगा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विभा शुक्ला ने विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों की सूची भी प्रेषित करने का निर्देश दिया है।

पूर्व शिक्षक विधायक डा. प्रमोद मिश्र ने बताया कि सरकार की योजना छात्र के सापेक्ष सरप्लस शिक्षकों को सेवानिवृत्त करने की है। माध्यमिक शिक्षक संघ इसका जोरदार विरोध करेगा। इस क्रम में बीएसए जय करन यादव ने बताया कि परिषदीय विद्यालय में मानक से कम छात्र होने पर हेडमास्टर पद समाप्त कर दिया जाता है। इसके स्थान पर प्रभारी नियुक्त करने का प्रावधान है। जुलाई से इसकी पड़ताल फिर से की जाएगी।

समान कार्य के लिए समान वेतन व पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग।
उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ ने सीएम को संबोधित डीएम कार्यालय को सौंपा
भ्रष्टाचार से मुक्त हों शिक्षा विभाग के दफ्तर।
स्थाई किए जाएं कंप्यूटर व व्यावसायिक शिक्षक।
राज्य कर्मचारियों के समान शिक्षकों को भी मिले चिकित्सा सुविधा।
प्रयोगशाला सहायक, सुरक्षा व सफाई कर्मियों की हो नियुक्ति।

Thursday, 11 May 2017

शिक्षा निदेशालय में सभी अफसरों की तैयार हो रही सेवा विवणिका

11 मई 2017: इलाहाबाद : सूबे के अन्य महकमों के मुकाबले शिक्षा विभाग में अफसर नहीं बदले हैं। अहम पद हो या फिर आम पद हर जगह पर वही चेहरे हैं, जिन्हें पिछली सरकार ने बैठाया था। इन दिनों शिक्षा निदेशालय में फेरबदल की अलग ही तस्वीर दिख रही है। यहां सभी अफसरों की पूरी ‘कुंडली’ यानी सेवा विवरणिका तैयार हो रही है। अफसर खुद वह प्रपत्र भर रहे हैं, जिसमें कब और कहां तैनात रहे हैं इसका विस्तृत विवरण है। इन सूचनाओं से सरकार को फेरबदल करने में सहूलियत मिलना तय है। 

शिक्षा महकमे में बदलाव न होने को लेकर इधर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। अफसर पहले यह तर्क देते रहे कि बेसिक शिक्षा के स्कूलों में मूल्यांकन व नया सत्र शुरू होने के बाद बदलाव होगा। वहीं, माध्यमिक के अफसर बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद इधर से उधर होंगे। बेसिक स्कूलों का सत्र शुरू हुए एक माह बीत चुका है तो माध्यमिक में बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन पूरा हो रहा है। इसी बीच शिक्षा निदेशालय में अफसरों का पूरा ब्योरा कंप्यूटराइज्ड करने का आदेश आ गया। निदेशालय, जिला व मंडलों पर तैनात अफसरों को पत्र भेजकर निर्देश दिया गया है कि वह अपनी तैनाती का पूरा विवरण पत्रक में भरकर अविलंब निदेशालय में जमा कराएं। इसमें हर अफसर को सेवा शुरू होने से लेकर अब तक कब वर्ष या माह में कहां तैनात रहा है का ब्योरा देना है। इस कार्य से महकमे को यह आसानी होगी कि पुरानी कोई गड़बड़ी सामने आने पर आरोप तय नहीं हो पाते कि आखिर उस समय वहां पर कौन था और अब वह कहां है। यह रिकॉर्ड कंप्यूटराइज्ड होने पर आगे का फेरबदल उसी में जुड़ता जाएगा। यही नहीं सूबे की सरकार इस रिकॉर्ड के जरिए यह भी देख सकती है कि सपा या फिर बसपा शासनकाल में किन अफसरों को मलाईदार जगहों पर तैनाती मिली थी। कौन से ऐसे अफसर हैं जो दोनों सरकारों के चहेते रहे हैं और वह कौन अधिकारी हैं जो लगातार हाशिये पर रखे गए।

शिक्षा निदेशालय में निदेशालय, जिला व मंडलों से तेजी से प्रपत्र भरकर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि यह काम पूरा होते ही बड़ा फेरबदल होगा। माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक रमेश ने बताया कि सेवा विवर्णिका जवाबदेही तय करने के लिए तैयार कराई जा रही है। ‘क’ व ‘ख’ वर्ग के अफसरों की रिपरेट मांगी जा रही : शिक्षा निदेशालय से इन दिनों प्रदेश के ‘क’ व ‘ख’ वर्गीय अफसरों के संबंध में आये दिन रिपोर्ट मांगी जा रही हैं। यह कार्य भी होने वाले फेरबदल को ध्यान में रखते हुए हो रहा है। सरकार इस पर गंभीर है कि तैनाती पाने वाले अफसरों पर दाग न हों, लेकिन उन अफसरों पर अंगुली उठ रही है जो दागदार हैं और अब भी नीति नियंता बने हैं। विभागीय पदोन्नति पर सब मौन : शिक्षा महकमे में निदेशक, अपर निदेशक, संयुक्त शिक्षा निदेशक समेत तमाम अहम पद खाली हैं। शासन ने इन्हें भरने के लिए संभावित अफसरों की रिपोर्ट भी निदेशालय से मंगा ली है लेकिन, डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक का मुहूर्त तय नहीं हो रहा है। शिक्षा निदेशक बेसिक का पद दो माह से खाली था, यह प्रकरण उठने पर नियमित तैनाती करने के बजाये वरिष्ठ अफसर को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। यही हाल अन्य पदों का भी है।

कुंडली देखकर बदले जायेंगे अफसर, शिक्षा निदेशालय में सभी अफसरों की तैयार हो रही सेवा विवरणिका

11 मई 2017: इलाहाबाद: सूबे के अन्य महकमों के मुकाबले शिक्षा विभाग में अफसर नहीं बदले हैं। अहम पद हो या फिर आम पद हर जगह पर वही चेहरे हैं, जिन्हें पिछली सरकार ने बैठाया था। इन दिनों शिक्षा निदेशालय में फेरबदल की अलग ही तस्वीर दिख रही है। यहां सभी अफसरों की पूरी ‘कुंडली’ यानी सेवा विवरणिका तैयार हो रही है। अफसर खुद वह प्रपत्र भर रहे हैं, जिसमें कब और कहां तैनात रहे हैं इसका विस्तृत विवरण है। इन सूचनाओं से सरकार को फेरबदल करने में सहूलियत मिलना तय है। शिक्षा महकमे में बदलाव न होने को लेकर इधर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। अफसर पहले यह तर्क देते रहे कि बेसिक शिक्षा के स्कूलों में मूल्यांकन व नया सत्र शुरू होने के बाद बदलाव होगा। वहीं, माध्यमिक के अफसर बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद इधर से उधर होंगे।

बेसिक स्कूलों का सत्र शुरू हुए एक माह बीत चुका है तो माध्यमिक में बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन पूरा हो रहा है। इसी बीच शिक्षा निदेशालय में अफसरों का पूरा ब्योरा कंप्यूटराइज्ड करने का आदेश आ गया। निदेशालय, जिला व मंडलों पर तैनात अफसरों को पत्र भेजकर निर्देश दिया गया है कि वह अपनी तैनाती का पूरा विवरण पत्रक में भरकर अविलंब निदेशालय में जमा कराएं। इसमें हर अफसर को सेवा शुरू होने से लेकर अब तक कब वर्ष या माह में कहां तैनात रहा है का ब्योरा देना है। इस कार्य से महकमे को यह आसानी होगी कि पुरानी कोई गड़बड़ी सामने आने पर आरोप तय नहीं हो पाते कि आखिर उस समय वहां पर कौन था और अब वह कहां है। यह रिकॉर्ड कंप्यूटराइज्ड होने पर आगे का फेरबदल उसी में जुड़ता जाएगा। यही नहीं सूबे की सरकार इस रिकॉर्ड के जरिए यह भी देख सकती है कि सपा या फिर बसपा शासनकाल में किन अफसरों को मलाईदार जगहों पर तैनाती मिली थी। कौन से ऐसे अफसर हैं जो दोनों सरकारों के चहेते रहे हैं और वह कौन अधिकारी हैं जो लगातार हाशिये पर रखे गए। शिक्षा निदेशालय में निदेशालय, जिला व मंडलों से तेजी से प्रपत्र भरकर आ रहे हैं।

माना जा रहा है कि यह काम पूरा होते ही बड़ा फेरबदल होगा। माध्यमिक शिक्षा के अपर निदेशक रमेश ने बताया कि सेवा विवर्णिका जवाबदेही तय करने के लिए तैयार कराई जा रही है। ‘क’ व ‘ख’ वर्ग के अफसरों की रिपरेट मांगी जा रही : शिक्षा निदेशालय से इन दिनों प्रदेश के ‘क’ व ‘ख’ वर्गीय अफसरों के संबंध में आये दिन रिपोर्ट मांगी जा रही हैं। यह कार्य भी होने वाले फेरबदल को ध्यान में रखते हुए हो रहा है। सरकार इस पर गंभीर है कि तैनाती पाने वाले अफसरों पर दाग न हों, लेकिन उन अफसरों पर अंगुली उठ रही है जो दागदार हैं और अब भी नीति नियंता बने हैं।

विभागीय पदोन्नति पर सब मौन

शिक्षा महकमे में निदेशक, अपर निदेशक, संयुक्त शिक्षा निदेशक समेत तमाम अहम पद खाली हैं। शासन ने इन्हें भरने के लिए संभावित अफसरों की रिपोर्ट भी निदेशालय से मंगा ली है लेकिन, डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक का मुहूर्त तय नहीं हो रहा है। शिक्षा निदेशक बेसिक का पद दो माह से खाली था, यह प्रकरण उठने पर नियमित तैनाती करने के बजाये वरिष्ठ अफसर को अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। यही हाल अन्य पदों का भी है।

UPTET NEWS: मुझे पता है, कैसे होते हैं शिक्षकों के तबादले: योगी


11 मई  2017: मेरठ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ आगमन को एक दिन बीत चुका है। लेकिन अफसर अभी भी समीक्षा बैठक में सीएम द्वारा की गई सुधार के साथ सख्ती की डोज की खुमारी से बाहर नहीं निकल पाए हैं। बैठक में योगी ने अन्य मुददों के साथ बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के स्थानांतरण और टूटी सड़कों पर नाराजगी व्यक्त कर सुधार के सख्त निर्देश दिए।

आयुक्त सभागार में मंगलवार की दोपहर आयोजित बैठक में करीब सवा दो घंटे योगी आदित्यनाथ ने मंडल की समीक्षा की। विकासकारी योजनाओं के साथ कानून व्यवस्था की जानकारी ली। लेकिन मुख्यमंत्री का सबसे अधिक ध्यान बेसिक शिक्षा विभाग पर रहा। योगी ने शिक्षकों की तबादला नीति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मुङो पता है कैसे शिक्षकों के तबादले देहात के स्कूलों से शहर में हो जाते हैं। सीएम ने पूछा कि शहर क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने के बाद भी शिक्षकों की संख्या अधिक क्यों होती है? अब ऐसा नहीं चलेगा। अधिकारियों को खुद में सुधार करना होगा और शहर आए शिक्षकों को वापस ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भेजना होगा।


अफसरों से सवाल करते हुए सीएम ने पूछा कि स्कूलों के लिए किसी अधिकारी ने अपने स्तर से कुछ किया है क्या? बाद में उन्होंने खुद ही निर्देश देते हुए कहा कि हर अधिकारी एक स्कूल को गोद ले और वहां शिक्षा के साथ अन्य व्यवस्थाओं को भी अपने स्तर से सुधार करें। इसके अलावा बच्चों को स्कूल लाने के लिए भी विशेष अभियान चलाए। उधर, टूटी सड़कों पर भी मुख्यमंत्री का पूरा जोर रहा। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि 15 जून तक का समय सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए दिया है। इसके बाद कोई बहाना नहीं सुना जाएगा। सड़क में गड्ढा दिखने पर तुरंत कार्रवाई कर दी जाएगी। योगी ने बैठक समाप्त होने के समय कहा कि परिवर्तन के लिए सरकार का गठन हुआ है। अधिकारी खुद को बदल लें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

जाँच, नियुक्ति सब ठप, बाकि सब चल रहा

11 मई 2017: इलाहाबाद : प्रदेश भर के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रवक्ता, एलटी ग्रेड शिक्षक व प्रधानाचार्य का चयन करने वाला संस्थान इन दिनों कहने भर को ठप है। अफसरों का कहना है कि सरकार के निर्देश पर नियुक्ति व परिणाम जारी करने पर रोक है, यहां के कार्यो की जांच चल रही है।

हकीकत यह है कि कुछ विषयों के परिणाम रोकने के अलावा यहां की सारी गतिविधियां हो रही हैं। आदेश के उलट कार्यो की जांच प्रक्रिया पूरी तरह से जरूर ठप है। प्रदेश सरकार के निर्देश पर उप्र लोकसेवा आयोग के बाद अन्य भर्ती आयोगों व बोर्डो में नियुक्ति और चयन की प्रक्रिया ठप करा दी गई है। अफसरों का कहना है कि संबंधित आयोगों की जांच के बाद भर्तियां होंगी लेकिन, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में सिर्फ नियुक्तियां ठप हैं और जांच हो नहीं रही। चयन बोर्ड में कुछ दिन पहले जिन विषयों के परिणाम जारी हो चुके हैं उनके अभ्यर्थियों को विद्यालय का आवंटन हुआ।

मंगलवार को 2011 प्रवक्ता के 15 विषयों की उत्तर माला जारी हुई है और अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गई है। अब रिजल्ट को संशोधित करने की तैयारी है। यह गतिविधियां खुद बता रही हैं कि चयन बोर्ड में सब कुछ चल रहा है, वह केवल कहने भर को ठप है, क्योंकि जिन विषयों की उत्तरकुंजी जारी की गई है वह पहले से लंबित नहीं थी, बल्कि इधर के दिनों में ही मूल्यांकन पूरा होने के बाद शासन के निर्देश पर उत्तर माला जारी की गई है। इसी तरह से चयनित अभ्यर्थियों को विद्यालय का आवंटन भी किया गया है। 

अभ्यर्थी यह सवाल कर रहे हैं कि 2011 टीजीटी के छह विषयों पर ही केवल रोक है, बाकी काम चल रहे हैं। ऐसे में क्या और कहां पर जांच हो रही है। यदि विद्यालय आवंटन, उत्तर माला और रिजल्ट संशोधन किया जा रहा है, तब जांच होने का कोई मतलब ही नहीं है। अभ्यर्थी कह रहे हैं कि सरकार व चयन बोर्ड के अफसर मिलकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। रोक के नाम पर 2016 की परीक्षा तैयारियां बाधित हैं इसमें नुकसान सिर्फ युवाओं का होना है, जहां खेल होने की आशंका है वह प्रक्रिया रुकी नहीं है, ऐसे में जांच के नाम पर चयन बोर्ड ठप कराना युवाओं की समझ में नहीं आ रहा है। उधर, चयन बोर्ड के अफसर कह रहे हैं कि नियुक्तियां व परिणाम घोषणा पर रोक है उसका पूरा पालन हो रहा है।

हंिदूी का परिणाम संशोधन आज : चयन बोर्ड गुरुवार को 2013 हंिदूी प्रवक्ता का परिणाम संशोधित करने की तैयारी में है। यह रिजल्ट पहले भी संशोधित हो चुका है। चयन बोर्ड ठप होने के निर्देश के बाद भी ऐसे कार्य अंदर खाने चल रहे हैं।’ माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में कामकाज जांच के नाम पर ठप विद्यालय आवंटन, रिजल्ट संशोधन, उत्तर माला नियमित जारी हो रहे

Primary School News: प्राइमरी स्कूलों में लगेंगे समर कैंप

11 मई 2017: लखनऊ : सरकारी प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की 21 मई से लेकर 30 जून तक हो रही गर्मी की छुट्टी मौज-मस्ती भरी होगी। सहायक बेसिक शिक्षा निदेशक (षष्ट मंडल) महेंद्र सिंह राणा की ओर से सभी स्कूलों के शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह इस बार स्कूल में समर कैंप लगाएं। इसमें विद्यार्थियों को ताइक्वांडो, जूडो, ड्राइंग, पेटिंग, नृत्य व गायन आदि सिखाया जाएगा।

सभी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह 12 मई तक खंड शिक्षा अधिकारी को अपना प्रस्ताव दे दें और 15 मई तक बेसिक शिक्षा अधिकारी इस पर अपनी सहमति देकर समर कैंप की व्यवस्था करें। समर कैंप लगाने वाले शिक्षकों को गर्मी की छुट्टी में काम करने के एवज में विभागीय नियमों के अनुसार उपार्जित अवकाश दिया जाएगा। महेंद्र सिंह राणा ने बताया कि लखनऊ मंडल के सभी स्कूलों के शिक्षकों को यह निर्देश भेज दिए गए हैं। वहीं इस बार सभी शिक्षकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि कुल 41 दिनों की छुट्टियों में विद्यार्थियों को हर विषय में होमवर्क और प्रोजेक्ट वर्क दें। विज्ञान के जो अच्छे प्रोजेक्ट हों उन्हें आगे इंस्पायर अवार्ड के लिए भी भेजा जाए।

फिलहाल विद्यार्थी को कोर्स के साथ सामाजिक सरोकार से भी जोड़ा जाए। फिलहाल समर कैंप लगने से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास होगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह इसमें सहयोग करें।

UPTET SHIKSHAMITRA NEWS: बिना B.Ed वाले शिक्षामित्र/अतिथि शिक्षकों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

11 मई 2017: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे सभी कर्मचारियों के पक्ष में एक टिप्पणी की है जो सरकारी स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे हैं लेकिन उनके पास बीएड या इसके समकक्ष डिग्रियां नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 'यदि वे शिक्षक नहीं तो क्या हैं आप उनका वर्क प्रोफाइल बताएं, उनका वर्क प्रोफाइल यही है कि वे पढ़ा रहे हैं, यह अनुभव टीईटी और बीएड से कहीं ज्यादा है, जो सिर्फ दो वर्ष के कोर्स हैं। बता दें कि ऐसा ही मामला मध्यप्रदेश में अतिथि शिक्षकों के संदर्भ में लंबित है। कमोवेश देश के हर राज्य में ऐसा मामला लंबित है। पदनाम अलग अलग हैं लेकिन सरकारों ने नियमित शिक्षकों के अभाव में कुछ अस्थाई शिक्षकों को भर्ती किया और उनसे अध्यापक कार्य कराया। उनके पास डिग्री नहीं है लेकिन अनुभव है। अब आरटीई आ जाने के बाद ऐसे सभी अनुभवी शिक्षकों का भविष्य संकट में आ गया है।

यूपी में शिक्षामित्रों को नियमित करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि 1.75 लाख शिक्षामित्र 17 वर्षो से पढ़ा रहे हैं, उन्हें उसका कुछ वेटेज मिलना चाहिए। जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा कि उम्र सीमा में छूट के अलावा उन्हें शिक्षण अनुभव का वेटेज शिक्षक भर्ती आवेदन में मिलना चाहिए।

कोर्ट ने यह सकारात्मक टिप्पणी तब की जब बीएड और टीईटी पास अभ्यर्थी के वकीलों ने कहा कि शिक्षामित्र यूपी बेसिक के शिक्षा कानून के तहत शिक्षक नहीं हैं। उन्हें सरकार ने पीछे के रास्ते से प्रवेश दिया है। उन्हें उम्र सीमा में ही छूट दी जा सकती है लेकिन कोर्ट ने कहा कि यदि वे शिक्षक नहीं तो क्या हैं आप उनका वर्क प्रोफाइल बताएं। उनका वर्क प्रोफाइल यही है कि वे पढ़ा रहे हैं। उनका यह अनुभव टीईटी और बीएड से कहीं ज्यादा है, जो सिर्फ दो वर्ष के कोर्स हैं।

दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के वकील ने कहा कि 50 हजार से ज्यादा शिक्षामित्र पूरी योग्यता रखते हैं और वे टीईटी भी पास हैं। बीएड उम्मीदवारों के वकीलों ने दलील दी कि शिक्षक बनने के योग्य दो लाख से ज्यादा अभ्यर्थी हैं। उन्होंने कहा, शिक्षा के अधिकार कानून, 2010 लागू होने के बाद सरकार ने अब तक कोई ऐसा शपथपत्र पेश नहीं किया है, जिसमें यह आंकड़ा हो कि योग्य उम्मीदवार न होने से शिक्षामित्रों को रखना पड़ा था।

कोर्ट ने पहले क्या कहा था

पिछली सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी शिक्षामित्रों की नियुक्ति संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नहीं है। उमादेवी फैसले (2006) के तहत ये नियुक्तियां अवैध हैं। कोर्ट ने कहा था कि उन्हें भर्ती में बैठने के लिए उम्रसीमा में छूट दी जा सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट दो वर्ष पूर्व इन नियुक्तियों को अवैध ठहरा चुका है, लेकिन अब मामला शिक्षामित्रों के फेवर में जाता दिखाई दे रहा है। मामले की सुनवाई जारी है।

UPTET NEWS: शिक्षक आज भरेंगे हुंकार, प्रदेश भर के विद्यालयों में खाली पड़े 40 प्रतिशत पद भरने की मांग

11 मई 2017: इलाहाबाद : लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज शिक्षक गुरुवार को आवाज बुलंद करेंगे। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ ‘शर्मा गुट’ के बैनर तले डीआइओएस कार्यालय पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी करेंगे। संयोजक अनय प्रताप सिंह, महेशदत्त शर्मा, कुंज बिहारी मिश्र, अनुज पांडेय ने बताया कि हमारी मांग वित्तविहीन शिक्षकों को पूर्णकालिक घोषित करके समान कार्य के लिए समान वेतन का भुगतान, पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करना, सहायता प्राप्त विद्यालय के शिक्षकों को निश्शुल्क चिकित्सा सुविधा, के साथ प्रदेश भर के विद्यालयों में खाली पड़े 40 प्रतिशत पद भरने की है।शिक्षक आज भरेंगे हुंकार।