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Tuesday, 23 May 2017

7th Pay Commission News : मई माह से सातवां वेतन निर्धारण होगा


नई पेंशन और बेसिक में कटौती: नयी पेंशन नीति एक धोखा है इसे लेने से पहले एक उदाहरण देखे फिर सोचे क्या नयी पेंशन लेना सही होगा या नही

अन्य स्रोत से:"मिशन पुरानी पेंशन"

नई पेंशन और बेसिक में कटौती

मित्रों जैसा आप सब को पता है कि पुरानी पेंशन की लड़ाई विभिन्न संगठनों द्वारा जोर शोर से चल रही है जिसमे छोटा सा योगदान मैं भी दे रहा हूँ। जीत निश्चित है बस आप को धैर्य रखना होगा तथा सहयोग देना होगा ताकि जो लड़ रहे है उनका मनोबल मजबूत रहे. आज जब मामला कोर्ट में है तो भी सरकार कुछ भी नही बोल रही क्योकि उसके पास बोलने को कुछ है ही नही अगर बोलेगी तो सालो से बोला जा रहा झूट पकड़ा जायेगा।पूरा चुनाव बीत गया पर किसी भी राजनितिक पार्टी ने लाखों लोगो के इस संवेदनशील मुद्दे को अपने चुनावी मुद्दे में शामिल नही किया जो की सोचनीय है इसका एक कारण जो मुझे समझ में आया वो ये है कि हम ये साबित नही कर पाए की पेंशन का मामला हमारे लिए महत्वपूर्ण है और हम उसे ही वोट करेंगे जो इसको लागु करने की बात करेगा।

सरकार ने अपनी गलत नई पेंशन नीति कई विभागों में लागू कर रखी है और इसकी कटौती सुरु है अगर जिस दिन ये गलत कटौती सुरु की गयी थी उसी दिन हर व्यक्ति इसे लेने से इंकार कर देता और कोई कटौती न करवाता तो ये नयी पेंशन लागु ही न हो पाती। हमारे साथी गलत का

UPTET उत्तर प्रदेश के 99 हजार शिक्षकों की टेंशन हो गई खत्म, सुप्रीम कोर्ट से आई बड़ी खुशखबरी


लखनऊ. उत्तर प्रदेश के करीब 99 हजार प्राथमिक सहायक शिक्षकों को राहत मिलने के आसार दिख रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि प्राथमिक सहायक शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) महज क्वालीफाइंग है न कि मेरिट का एकमात्र आधार।

एनसीटीई ने दाखिल किया हरफनामा

सोमवार को एनसीटीई ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामें में कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा-23 (1) को ध्यान में रखते हुए उसने 23 अगस्त 2010 को अधिसूचना

शिक्षामित्रों के सुप्रीमकोर्ट में आने वाले निर्णय पर अलर्ट जारी किये जाने पर शिक्षामित्रों बौखलाए, BSA सौंपा ज्ञापन


आखिरकार वेतन के लिए शिक्षकों को क्यों हर माह करना पड़ता है आंदोलन


प्रदेश में मई महीने में साफ्टवेयर चेंज होना है। साफ्टवेयर चेंज होने का बड़ा वजह मई से शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दिया जाना है। साफ्टवेयर की वजह से ही बेसिक शिक्षा परिषद ही अमूमन सभी विभागों वेतन प्रक्रिया लेट चल रही है। यह मामला सबकी जानकारी में है तो फिर सवाल यह है कि आखिर जानबूझ कर बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापकों ने वेतन के लिए धरना प्रदर्शन क्यों किया। अभी तक माना यह जाता रहा है कि परिवर्तन का स्वागत में शिक्षक समुदाय ही अगुआ रहा है। लेकिन अगर शिक्षक ही पविर्तन के दौर में सब्र करने को तैयार नहीं तो फिर किसे दोष दिया जाए। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग के लेखाधिकारी ने भी अपनी ओर से यह साफ करने की जहमत नहीं उठायी कि वेतन में रही देरी की वजह क्या है। इसी का फायदा उठाते हुए गुटों में बंटे शिक्षक नेता अपनी नेतागीरी चमकाने के मौके की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वेतन को लेकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर शिक्षकों ने प्रदर्शन किया। यही नहीं, 23 मई से अनशन करने तक की धमकी दी है।

Big Breaking News : सुप्रीम कोर्ट द्वारा "खतरनाक" शब्द का प्रयोग- किस ओर करता है इशारा


अन्य स्त्रोत से: सुप्रीम कोर्ट द्वारा "खतरनाक" शब्द का प्रयोग।

समाचार पत्रो मे प्रकाशित हुआ कि सुप्रीम कोर्ट ने NCTE की टिप्पणी को खतरनाक बतलाया है । मेरे विचार से सुप्रीम कोर्ट ने सटीक शब्द का प्रयोग किया है । NCTE के अनुसार टेट एक पात्रता परीक्षा है , उससे अधिक कुछ नही ।

तो तय मानिये यह खतरनाक ही है 72825 के दृष्टिकोण से । कारण जज का सोचना है कि यदि टेट एक पात्रता है तो 72825 भर्ती जो कि टेट पर हुयी अवैध है (कारण NCTE गाइडलाइन का पालना न होना) और उसके स्थान पर 72825 अकादमिक विज्ञापन बहाल करना होगा तो इस स्थिति वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुयी टेट भर्ती को साइडलाइन करना एक बङी चुनौती होगी ।

Friday, 19 May 2017

अखिलेश बोले, अगर 15 लाख अकाउंट में आ सकते हैं तो चांद पर दे सकते हैं लोहिया आवास

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को लखनऊ के विधानमंडल में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान अपना पक्ष रखा। उन्होंने भाजपा की सरकार पर करारे हमले किए और तंज कसे। अखिलेश ने कहा कि हमने एक व्य‌क्ति से कहा कि अगर फिर से सपा सरकार आई तो हम चांद पर लोहिया आवास देंगे। उसने कहा, ऐसा कैसे होगा? मैंने जवाब दिया कि जब भाजपा के लोग अकाउंट में 15 लाख रुपये दे सकते हैं तो हम चांद पर लोहिया आवास क्यों नहीं दे सकते।

अखिलेश ने अपने भाषण में सरकार से सवाल किया कि हमने लखनऊ मेट्रो बनवाई। अब तक इसमें क्या किया गया है‌, अब तक मेट्रो क्यों नहीं चली। इस पर नेता सदन जवाब दीजिए। अखिलेश ने कहा कि हमने सैफई बनाई अब भाजपा के लोग 325 सैफई बनाएं। (यूपी विधानसभा में भाजपा व भाजपा समर्थक विधायकों की संख्या 325 है।)

अखिलेश ने कहा कि न जाने हम पर कानून-व्यवस्‍था को लेकर क्यों सवाल उठाए जाते हैं। जबकि इस मोर्चे पर ये सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। मथुरा, वाराणसी व बुलंदशहर की घटना ने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। अखिलेश ने कहा कि आप गाय बचाना नहीं चाहते हैं बल्कि समाज में नफरत की दीवारें बनाना चाहते हैं। आप समाज में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। जो जहर आपने घोला है, उससे नुकसान आपको भी होगा।

मौलाना का ऐलान, कुलभूषण के जूते नवाज शरीफ को पहनाओ और 20 लाख ले जाओ

कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान द्वारा फांसी की सजा दिए जाने के खिलाफ पूरा देश एकजुट हो गया है। एक तरफ कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने विदेशमंत्री सुषमा स्वराज की अपील पर पाकिस्तान के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय अदालत में ड्राफ्टिंग के लिए मदद की, तो दूसरी तरफ आम जनमानस में भी पाकिस्तान के खिलाफ रोष है। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल के रहने वाले मौलाना आतिफ कादरी ने ऐलान किया है कि जो व्यक्ति पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के गले में कुलभूषण जाधव के जूते की माला पहनाकर पूरे भारत में घुमाएगा, उसे वो 20 लाख रुपए बतौर इनाम में देंगे।

मौलाना कादरी ने जाधव को फांसी देने पर गुस्सा जताते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति कुलभूषण जाधव जी के जूते को नवाज के गले में बांधकर उसे पूरे भारत में घुमाएगा, मैं उसे 20 लाख रुपए ईनाम के तौर पर दूंगा।

यूपी में प्रशासनिक फेरबदल जारी, फिर हुए 74 IAS अफसरों के तबादले

यूपी में प्रशासनिक फेरबदल जारी है। शुक्रवार शाम को योगी सरकार ने एक बार फिर बड़ी संख्या में तबादले किए। दो दिन पहले 67 आईपीएस अफसरों के तबादले के बाद सरकार ने शुक्रवार को 74 आईएएस अफसरों के तबादले कर ‌दिए।

गौरतलब है कि पिछले दो महीने के सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्‍था को लेकर सरकार की निंदा होती रही है, जिसे सुधारने के लिए सरकार एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। अभी हाल ही में पहले सहारनपुर हिंसा और फिर मथुरा में सर्राफा कारो‌बारियों की हत्या से भी इस मुद्दे पर सरकार की किरकिरी हो चुकी है। जिसके बाद सरकार के इन कदमों को प्रशासनिक सर्जरी के तौर पर देखा जा रहा है।

तबादला किए गए अफसरों में से कई के विभाग ‌बदल दिए गए हैं तो कई तो वर्तमान जिम्मेदारी के साथ ही नई जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। अभी तक राजस्व परिषद में तैनात चंद्र प्रकाश को वर्तमान पद के साथ ही कृषि उत्पादन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। अब तक प्रतीक्षारत रहे शशि प्रकाश गोयल को नागरिक उड्डयन एवं राज्य सम्पत्ति तथा प्रोटोकॉल विभाग का प्रमुख सचिव पद दिया गया है।

UPTET उ.प्र. शिक्षक भर्तीः शिक्षामित्र, एकेडमिक और टेट मेरिट पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला किया रिजर्व

19 मई 2017: सुप्रीम कोर्ट में सहायक अध्यापक पद पर हुई नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने 12वें, 15वें, 16वें संशोधन, अकैडमिक, मेरिट एवं 9B टेट वेटेज पर सुनवाई करके फैसला सुरक्षित रख लिया है। आज इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं को सुनकर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट बाद में इस पर फैसला सुनाएगी। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल व जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने कहा कि हम कोर्ट द्वारा नियुक्त शिक्षक भर्ती को नहीं छेड़ेंगे। इसका मतलब है कि 72826 शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए टीचरों को कोई परेशानी नहीं होगी। 

NCTE की तरफ से कोर्ट में कहा गया है कि वेटेज देना राज्य सरकार का अधिकार है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा देने को कहा है। NCTE ने अपने पक्ष में कहा कि उसे सिर्फ न्यूनतम योग्यताओं से मतलब है। 
इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में इस पर फैसला सुरक्षित रख दिया गया था। शिक्षामित्रों के साथ-साथ यूपी सरकार भी इस फैसले के इंतजार में है। टैट पास शिक्षामित्रों की ओर से पेश हुए अधिवक्ता संजय त्यागी ने कहा कि यूपीटेट पास शिक्षामित्रों को छूट दी जाए। उन्होंने कोर्ट में कहा कि ये लोग पूरी तरह से योग्य हैं और इन्होंने टेट परीक्षा भी उत्तीर्ण की है। 72826 भर्ती में भी इनका सिलेक्शन हो गया था लेकिन सरकार ने पहले से ही इनका समायोजन कर लिया था इसलिए इनको सहायक अध्यापक के पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। इस पर जज साहब ने कहा कि आप टैट है। हम इसको नोट कर लेते हैं।  इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 शिक्षामित्रों की नियुक्तियों को अवैध ठहरा दिया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर में इस आदेश पर स्टे लगा दिया था।

क्या है मामला:

ये मामला पौने दो लाख शिक्षा मित्रों की सहायक शिक्षक बनाने का है। दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इनकी नियुक्ति को असंवैधानिक करार देकर इसे निरस्त कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ ही शिक्षा मित्र और यूपी सरकार एससी पहुंचे।