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Sunday, 8 February 2015

72 हजार शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़ा

केस-एक : अभ्यर्थी दो रोल नम्बर एक

टीईटी रोल नम्बर 07047380 पर शिव सागर जायसवाल (पिता का नाम : श्री कृष्ण जायसवाल) के 120 अंक दिखाकर प्रशिक्षु शिक्षक चयन 2011 की द्वितीय अन्तिम सूची में शामिल किया गया है। जबकि, माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट http://marks.upmsp.edu.in/TetResult2011Primary.aspx पर दिए गए यूपी टीईटी- 2011 के परीक्षा फल में यह रोल नम्बर शिवा (पिता का नाम : इंद्र नारायण शुक्ला) का दिखाया गया है। इसके मुताबिक, 81 अंक पाकर यह छात्र परीक्षा में फेल है।

केस-दो : फर्जी रोल नम्बर पर अभ्यर्थी चयनित

जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षि संस्थान (डायट) शाहजहांपुर ने प्रशिक्षु शिक्षक चयन 2011 की दूसरी सूची जारी की। इसमें रोल नम्बर 07099796 सुनील कुमार (पिता का नाम : राम बख्श सिंह) के अंक 117 दिखाए गए हैं। जबकि, यूपी टीईटी- 2011 के परीक्षा फल में यह रोल नम्बर ही शामिल नहीं है। इसी सीरिज के कई अन्य रोल नम्बर 07099001 अरुण सिरोही, 07099144 शिव कुमार पाल, 07099676 धरम नरेश, 07100050 रितेश कुमार, 07100105 राजीव सिंह, 07100186 अमित कटियार और 07100213 पूरन लाल भी परीक्षा परिणाम में नहीं है।

केस-तीन: महिला के नाम पर पुरुष का आवेदन

हरदोई में ओबीसी पुरुष वर्ग में रोल नम्बर 04016112 योगेश कुमार नाम के अभ्यर्थी ने आवेदन किया। आवेदन में इसने 116 अंक बताए हैं। जबकि, यह रोल नम्बर पूनम सिंह नाम की महिला का है।

जोकि, 93 अंक पाकर फेल हुई। विभागीय जांच में इसकी खुलासा भी हुआ है। इसी जिले की सूची में रोल नम्बर 08012002 मनोज कुमार के अंक 117 बताए गए।

जबकि, वास्तव में यह 95 अंक हैं। रोल नम्बर 16036540 जितेन्द्र सिंह के अंक सूची में 117 और वास्तव में 85 हैं। टीईटी रोल नम्बर 03033096 उमेश कुमार सिंह (पिता का नाम : नेत्र पाल सिंह) के 117 अंक दिखाकर नियुक्ति पत्र दिया गया है। जबकि, परीक्षा फल में 83 अंक बताकर इसे फेल बताया गया है।

प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में 72 हजार प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा सामने आया है।

आरोप है कि कई फर्जी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए हैं। इनमें ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिनके बताए रोल नम्बर टीईटी-2011 के वास्तविक परीक्षा परिणाम में ही नहीं हैं। विभिन्न जिलों में जारी चयनित छात्रों की सूची और टीईटी-2011 के वास्तविक परीक्षा परिणाम में उसके मिलान किए जाने पर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

खुलासे के बाद भर्ती प्रक्रिया में शामिल टीईटी-2011 उत्तीर्ण अभ्यर्थी काफी नाराज हैं। उनका कहना है कि इस फर्जीवाड़े के कारण कई पात्र अभ्यर्थियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है। इनके संगठन टीईटी उत्तीर्ण (2011) संघर्ष मोर्चा की ओर से निष्पक्ष जांच कर भर्तियां कराने की मांग उठाई है। संगठन के उपाध्यक्ष डॉ.एमपी सिंह ने कहा है कि इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में भी रखा जाएगा।

मार्कशीट से छेड़छाड़ कर बढ़ाए अंक: यह पूरा खेल फर्जी मार्कशीटों के आधार पर किया गया है। टीईटी उत्तीर्ण (2011) संघर्ष मोर्चा के डॉ.एमपी सिंह ने बताया कि 2011 में सपा सरकार ने टीईटी से जुड़े कई रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की बात कही थी। इसी का फायदा उठाने के लिए जालसाजों ने टीईटी अंक पत्रों की स्कैन कॉपी में छेड़छाड़ कर अंक बढ़ाकर आवेदन कर दिए।

फेल अभ्यर्थियों के रोल नम्बरों का इस्तेमाल: कई मामलों में फेल अभ्यर्थियों के रोल नम्बरों का इस्तेमाल भी किया गया है। चूंकि, यह अभ्यर्थी नियुक्ति पाने की उम्मीद खो चुके हैं। ऐसे में इनके रोल नम्बर का इस्तेमाल कर फर्जी मार्कशीट तैयार की गई। जिसमें, मनचाहे अंक दिखाकर आवेदन किए और नियुक्ति पत्र भी प्राप्त कर लिए गए हैं।

फिलहाल हमारे पास इस प्रकार का कोई मामला या शिकायत नहीं आई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर परीक्षा परिणाम जारी किए गए हैं। यहां वैरिफिकेशन के बाद ही नियुक्ति पत्र जारी किए जा रहे हैं। अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।

- सर्वेन्द्र विक्रम सिंह, निदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (एससीईआरटी)
छह सप्ताह में शिक्षकों की नियुक्ति का आदेश है
17 दिसम्बर को जारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले में प्रदेश सरकार को छह सप्ताह में प्राइमरी शिक्षकों की नियुक्ति करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सामान्य श्रेणी के जिन अभ्यर्थियों ने टीईटी परीक्षा में 70 फीसदी या उससे अधिक तथा आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों ने 65 फीसद या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं उनकी नियुक्ति की जाए।

2011 से है नौकरी पाने की आस

2011 में प्रदेश सरकार ने 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक पदों के लिए आवेदन मांगे थे। तभी से हजारों अभ्यर्थी नौकरी की आस लगाए बैठे हैं। उस समय टीईटी परीक्षा में हासिल अंकों के आधार पर भर्ती का फैसला किया गया, लेकिन 2012 में प्रदेश में सरकार बदल गई और भर्ती के नियमों में बदलाव कर दिया।

बदले नियमों में भर्ती हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में प्राप्त अंको को भी आधार माना गया। इस बदलाव को टीईटी पास कर चुके अभ्यर्थियों कोर्ट में चुनौती थी। तभी से इसको लेकर कानूनी जंग चल रही है

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